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व्यापार तकनीक क्या है

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आखिर क्या है Artemis Moon Mission ?

आर्टेमिस I NASA के नए चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम का पहला चरण है, जिसका उद्देश्य अंततः चंद्रमा की सतह पर दीर्घकालिक उपस्थिति स्थापित करना है। NASA के मुताबिक, आर्थिक लाभ और नई पीढ़ी के खोजकर्ताओं की प्रेरणा के लिए, NASA व्यापार तकनीक क्या है एक और वैज्ञानिक खोज के लिए चंद्रमा पर वापस जा रहा है। आर्टेमिस के मिशन के साथ, नासा ने पहली महिला को चंद्रमा पर उतारने की योजना बनाई है।

तीन परीक्षण डमी के अलावा, उड़ान व्यापार तकनीक क्या है में गहन अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए कई स्टोववे हैं। रॉकेट के अंदर ले जाए गए क्यूबसैट व्यापार तकनीक क्या है नामक शोबॉक्स के आकार के दस उपग्रह, एक बार ओरियन के चंद्रमा की ओर चोट करने के बाद अलग हो जाएंगे। अलग होने के बाद वे गहरे अंतरिक्ष में कई प्रकार के विज्ञान प्रयोग और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन करेंगे।

इंजन से जुड़े कुछ मुद्दों, लीक और तूफान के कारण हुई देरी के बाद आखिरकार बुधवार, नवंबर 16 के शुरुआती घंटों में अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा में कैनेडी स्पेस सेंटर से आर्टेमिस I मिशन अपना तीसरा लॉन्च प्रयास करने के लिए निर्धारित है। NASA को दो घंटे की विंडो के दौरान आर्टेमिस I रॉकेट लॉन्च करने की उम्मीद है जो 1:04 पूर्वाह्न ईएसटी (6:04 पूर्वाह्न जीएमटी) पर खुलता है। आपको बता दे की यह लॉन्च YouTube पर लाइव देखा जा सकेगा।

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LPG Cylinder: देश में लगभग 30 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता है, जबकि गैस सिलेंडरों की संख्या करीब 70 करोड़ है। इनमें सबसे अधिक ग्राहक इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के पास हैं।

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LPG Cylinder: एलपीजी पर लगेगा QR Code, जानिए क्या है सरकार की यह नई स्कीम

LPG Cylinder: देश में जैसे-जैसे गैस की कीमतों में इजाफा हो रहा है, सिलेंडरों से अवैध तरीके से गैस निकालने के मामले भी बढ़ रहे हैं।

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X1 एंडोस्कोपी : नई मशीन से पेट रोगों का एवं पेट के कैंसर का पता लगाना अब बहुत आसान हुआ

आधुनिकतम तकनीक वाली X1 एंडोस्कोपी मशीन के माध्यम से रोगों एवं पेट के कैंसर का जल्दी डायग्नोसिस किया जा सकेगा तथा साथ ही मरीजों को जल्दी उपचार मिलने से एवं मिनिमल इंवेजिव तरीके से या स्कारलेस तरीके से सर्जरी करने से अस्पताल से जल्दी छुट्टी दी जा सकेगी

गाजियाबाद, 18 नवूबर 2022. उत्तर भारत के निजी अस्पतालों की पहली X1 एंडोस्कोपी मशीन का उद्घाटन यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशांबी में हुआ। उदघाटन समारोह में गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुनिराज एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ भावतोष शंखधर ने फीता काट कर मशीन का उद्घाटन किया।

एसएसपी मुनिराज ने यशोदा अस्पताल के समस्त डॉक्टरों एवं स्टाफ को इस नई मशीन के हॉस्पिटल में लगने पर बधाई दी.

डॉ शंखधर ने कहा कि आधुनिकतम तकनीक वाली X1 एंडोस्कोपी मशीन के माध्यम से रोगों एवं पेट के कैंसर का जल्दी डायग्नोसिस किया जा सकेगा तथा साथ ही मरीजों को जल्दी उपचार मिलने से एवं मिनिमल इंवेजिव व्यापार तकनीक क्या है तरीके से या स्कारलेस तरीके से सर्जरी करने से अस्पताल से जल्दी छुट्टी दी जा सकेगी, इससे मरीज का खर्च भी कम होगा और असुविधा भी बचेगी.

क्या है X1 एंडोस्कोपी मशीन और यह कैसे काम करती है?

X1 एंडोस्कोपी मशीन एक्स1 वीडियो प्रोसेसर के साथ एलईडी प्रकाश स्रोत को इकट्ठा करके 5 एलईडी स्पेक्ट्रम तकनीक का प्रयोग करते हुए एक शक्तिशाली प्रणाली बनाती है और साथ ही एण्डोस्कोप को और अधिक कॉम्पैक्ट और हल्का बना देती है।

समारोह में हॉस्पिटल के मुक्य प्रबंध निदेशक डॉ पी एन अरोड़ा ने कहा कि उन्नत और जटिल थर्ड-स्पेस एंडोस्कोपिक प्रक्रियाओं को करने के लिए व्यापार तकनीक क्या है यह मशीन बहुत उपयोगी है। इसने एंडोस्कोपिक सर्जिकल प्रक्रियाओं को करने के तरीके में क्रांति ला दी है।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशांबी की पेट एवं लिवर विभाग के डायरेक्टर एवं प्रमुख डॉ कुणाल दास ने बताया कि X1 एंडोस्कोपी मशीन पारंपरिक सफेद रोशनी के अलावा NBI (नैरो बैंड इमेजिंग) और AFI (ऑटो फ्लोरेसेंस इमेजिंग) प्रदान करती है। CV-1500 नैदानिक और चिकित्सीय निर्णय के लिए शक्तिशाली उन्नत परिणाम प्रदान करता है।

नैरो-बैंड इमेजिंग क्या है?

डॉ कुणाल दास ने बताया कि नैरो-बैंड इमेजिंग एक उन्नत इमेजिंग प्रणाली है जो एंडोस्कोपिक छवियों को बढ़ाने के लिए ऑप्टिक डिजिटल तरीकों का प्रयोग करती है और म्यूकोसल सतह आर्किटेक्चर और माइक्रोवास्कुलर पैटर्न के विज़ुअलाइज़ेशन में सुधार करती है।

हॉस्पिटल के पेट एवं लिवर विशेषज्ञ डॉक्टर हरित कोठारी ने बताया कि पेट में घावों का पता लगाने में नैरो-बैंड इमेजिंग एक महत्वपूर्ण सहायक उपकरण के रूप में प्रयोग किया जाता है। महत्वपूर्ण रूप से, यह सामान्य और घातक घावों के बीच भेद करने में मुख्यतः मदद करता है। साथ ही बायोप्सी ( शरीर के अंग का टुकड़ा ) लेने के लिए सटीक रूप से जगह को चिन्हित करने और सही जगह से टुकड़ा निकालने में अत्यंत सहायक होता है। इस तकनीक से जीआई ट्रैक्ट कैंसर, गैस्ट्रिक कैंसर, कोलन कैंसर के बारे में और भविष्य में कैंसर रोगियों के शरीर में कैंसर किस गति से बढ़ेगा यह आसानी से पता लगाया जा सकता है। रसौली की भी आसानी से यह पहचान करता है।

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पशु चैट

खेती महज एक व्यापार या काम नहीं बल्कि इससे बढ़कर बहुत कुछ है। ये भी एक कारण है, जिसकी वजह से किसानों को देश में अन्नदाता भी कहा जाता है। लेकिन किसानों को इतनी बड़ी उपाधि देने के बाद भी किसानों की आर्थिक हालत बेहद बेकार है। जिसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है, हर साल फसल का बर्बाद होना या फसल की उत्पादकता बेहतर न होना। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए एक एग्रीटेक कंपनी ने एक तकनीक ईजाद की है।

इस तकनीक के जरिए किसानों को फसल और मौसम से जुड़ी कई जानकारियां मिल जाएंगी। इन्हीं जानकारियों के जरिए फसल को समय पर बचाया जा सकेगा। इस तकनीक को फसल सिस्टम का नाम दिया गया है। आज हम आपको अपने इस लेख और वीडियो में इसी फसल सिस्टम से जुड़ी जानकारियां देंगे। अगर आप इस फसल सिस्टम से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारियां हासिल करना चाहते हैं तो इस लेख पर अंत तक बने रहें।

क्या है फसल सिस्टम

ये फसल सिस्टम एक ऐसी तकनीक पर बना है जिसमें कई सेंसर और मशीन लगी हैं। जिनके जरिए किसान भाइयों को कई जानकारियां मिलती हैं। ये सिस्टम खेत में लगता है और यहां से सारी जानकारी किसान के फोन में मौजूद ऐप पर आ जाती है। ऐसे में अगर फसल में किसी भी तरह की दिक्कत है या फिर मौसम खराब होने वाला है या बारिश होने वाली ये बाते वक्त रहते पता चल जाती है। आइए चलिए जानते हैं आखिर कैसे काम करता है ये फसल सिस्टम

फसल सिस्टम कैसे काम करता है इसे आपको विस्तार से समझाने के लिए हमने नीचे कुछ पॉइंट दिए हुए व्यापार तकनीक क्या है हैं। इसके जरिए आप समझ जाएंगे कि ये फसल सिस्टम कैसे काम करते हैं।

  • इस फसल सिस्टम व्यापार तकनीक क्या है के तीन हिस्से हैं जो आपको अलग – अलग जानकारी देते हैं। जिसके बारे में हम आपको नीचे बता रहे हैं।
  • इसमें आपको महज एक बार ये सिस्टम खेत में लगाना होता है। जिसके बाद 24 घंटे 7 दिन ये आपको सटीक जानकारी देता रहता है।
  • इस सिस्टम के सबसे ऊपरी स्थान पर कई सेंसर लगे हैं जिसके जरिए वेदर कंडीशन, हवा का बहाव , बारिश से जुड़ी जानकारी मिल जाती है।
  • इसके अलावा इस सिस्टम के बीच में ब्रेन लक्स सिस्टम लगा होता है जो धूप छांव से जुड़ी जानकारी देता है।
  • इसमें लीव वेटनेस सिस्टम भी है जिससे आपको पता चलता है कि फसल में कितनी नमी है।
  • वहीं इस सिस्टम के दो सिरे जमीन में रहते हैं जिसमें लगे सेंसर मिट्टी की नमी से जुड़ी जानकारी देते हैं। इससे पता चल जाता व्यापार तकनीक क्या है है कि फसल को कब कितनी मात्रा में पानी चाहिए।
  • इसके अलावा फसल को मौसम के अनुसार किस तरह के कीटनाशक की जरूरत है ये भी पता चलता है।
  • वहीं अगर मिट्टी में पोषक तत्व कम हैं तो इस मशीन से ये भी जानकारी मिल जाती है।

Aftab Poonawala Narco Test: क्या नार्को टेस्ट से श्रद्धा हत्याकांड का सच आएगा सामने? जानिए कैसे इस तकनीक से पकड़ा जाता है झूठ

Aftab Poonawala Narco Test: क्या नार्को टेस्ट से श्रद्धा हत्याकांड का सच आएगा सामने? जानिए कैसे इस तकनीक से पकड़ा जाता है झूठ

दिल्ली पुलिस आफताब पूनावाला का कराएगी नार्को टेस्ट (Photo Credit – PTI)

Shraddha Walker Murder Case: दिल्ली पुलिस श्रद्धा वालकर हत्याकांड के आरोपी आफताब पूनावाला का नार्को टेस्ट (Aftab Narco Test) कराने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि आफताब पूछताछ में को-ऑपरेट नहीं कर रहा था। श्रद्धा के मोबाइल और शव को काटने में इस्तेमाल आरी की जानकारी नहीं दे रहा है।

क्या होता है नार्को टेस्ट?

नार्को टेस्ट का इस्तेमाल पुलिस झूठ पकड़ने के लिए करती है। नार्को टेस्ट के लिए संदिग्ध को ट्रुथ ड्रग नाम से आने वाली एक साइकोएक्टिव दवा दी जाती है या सोडियम पेंटोथोल का इंजेक्शन लगाया जाता है। ड्रग का डोज संदिग्ध के सेहत, उम्र और जेंडर को ध्यान रखकर तय किया जाता है। ड्रग शरीर में जाने के बाद व्यक्ति को अर्धबेहोशी की हालत में पहुंचा देता है।

अब सवाल उठता है कि इससे पुलिस झूठ कैसे पड़ती है? दरअसल इस वैज्ञानिक प्रयोगों पर आधारित तकनीक के असर आने पर पुलिस संदिग्ध से एक तय पैटर्न से सवाल पूछती है। अर्धबेहोशी की वजह से संदिग्ध अपने दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल कर नहीं पाता, इसलिए वह जानबूझकर झूठ बोलने में पूरी तरह सक्षम नहीं होता है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर सच निकलाने की कोशिश की जाती है।

कौन करता है नार्को टेस्ट?

अदालत की मंजूरी मिलने पर नार्को टेस्ट के लिए पूरी एक टीम तैयार की जाती है, फॉरेंसिक एक्सपर्ट, जांच अधिकारी, डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक आदि को मिलकर काम करना होता है। उम्रदराज, मानसिक रूप से कमजोर, गंभीर बीमारियों से ग्रस्त और नाबालिग पर यह टेस्ट नहीं किया जाता है। पहले भी कई मामलों में नार्को टेस्ट का इस्तेमा हो चुका है, उनमें से कुछ चर्चित मामले हैं- तेलगी केस, आरुषि हत्याकांड और निठारी केस।

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