बेस्ट फॉरेक्स सिग्नल

एमए क्या है?

एमए क्या है?

इलाहाबाद विश्वविद्यालय कट ऑफ 2022 (Allahabad University Cut Off 2022) जारी - यूजी और पीजी की कटऑफ सूची देखें

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी कटऑफ एमए क्या है? 2022 - इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने एक अधिसूचना जारी करते हुए सूचित किया है कि एयू सीयूईटी यूजी 2022 पंजीकृत उम्मीदवारों के लिए सुधार विंडो 17 तथा 18 अक्टूबर को दो दिनों के लिए खोला जाएगा। इसके साथ ही जिन एयू सीयूईटी यूजी 2022 पंजीकृत उम्मीदवारों ने अब तक अपनी फीस सबमिट नहीं की है, वे भी 18 अक्टूबर तक अपनी फीस जमा कर सकते है। इससे पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने एमएससी भूगोल, एमए जनसंचार और पत्रकारिता और एमएससी भौतिकी के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय 2022 की दूसरी कट ऑफ जारी की थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय 2022 कट ऑफ 30 सितंबर से allduniv.ac.in पर जारी करना फिर से शुरू कर दिया था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने पहले छात्रों द्वारा उठाई गई कुछ मांगों के आधार पर शेष राउंड और कार्यक्रमों के लिए एमए क्या है? इलाहाबाद विश्वविद्यालय 2022 पीजीएटी कट-ऑफ घोषणा को स्थगित कर दिया था। एयू ने ऑनलाइन मोड में 16 सितंबर से पीजी पाठ्यक्रमों के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय कट ऑफ 2022 शुरू किया था। यूजी पाठ्यक्रमों के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय कट ऑफ 2022 सीयुईटी में उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय 2022 कट ऑफ उम्मीदवारों की ओपनिंग और क्लोजिंग रैंक है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय कट ऑफ 2022 उम्मीदवारों के लिए चुने गए कार्यक्रम और उनकी श्रेणी के आधार पर भिन्न हो एमए क्या है? सकता है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी यूजी काउंसलिंग का शेड्यूल इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर कट ऑफ के साथ जारी किया जाएगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय कट ऑफ 2022 के बारे में अधिक जानकारी जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
Latest : इलाहाबाद विश्वविद्यालय पीजीएटी 2022 कट-ऑफ नोटिस की जांच करने के लिए - यहां क्लिक करें
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी पीजी कट ऑफ 2022 के लिए यहां क्लिक करें

इलाहाबाद विश्वविद्यालय कट ऑफ 2022 (Allahabad University Cut Off 2022) जारी - यूजी और पीजी की कटऑफ सूची देखें

1665837535280

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी कट ऑफ क्या है?

इलाहाबाद विश्वविद्यालय कट ऑफ वह अंक होता है जिसके आधार पर उम्मीदवारों को संबंधित कार्यक्रम की काउंसलिंग प्रक्रिया के लिए योग्य माना जाता है। केवल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कट ऑफ के बराबर या उससे अधिक अंक प्राप्त करने से उम्मीदवारों के लिए सीट सुनिश्चित नहीं हो जाती है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय कट ऑफ (Allahabad University Cut Off 2022 सूची में चयनित सभी उम्मीदवारों को अपने संबंधित विभाग / इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कॉलेज में जाकर दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करना होता है।

संस्कृत से एम ए करने के बाद क्या करें?

इसे सुनेंरोकेंमास्टर ऑफ आर्ट्स संस्कृत विषय की महत्वता को समझते हुए स्नातकोत्तर का कोर्स कीजिए। जिसकी अवधि 2 वर्ष की होती है तदोपरांत आप संस्कृत विषय में पारंगत हो जाएंगे। लेकिन संस्कृत विषय में एक खोजी के तौर पर गहन शोध करने के लिए आपको डॉक्टरेट की उपाधि लेनी होगी जिसके लिए पीएचडी करना होगा।

Mcom के बाद क्या करे?

एमकॉम के बाद आगे क्या पढ़ाई करें

  1. NET (नेशनल एबिलिटी टेस्ट) की परीक्षा दे सकते हैं
  2. पीएचडी कर सकते हैं
  3. एमफिल कर सकते हैं
  4. चार्टर्ड अकाउंटेंट का कोर्स कर सकते हैं
  5. कंपनी सेक्रेटरी का कोर्स कर सकते हैं इसके अलावा और भी बहुत सारे छोटे कोर्सेज जैसे –
  6. Taxation.एमए क्या है?
  7. Stock market.
  8. GST,

एमबीए की सैलरी कितनी होती है?

इसे सुनेंरोकेंइसके अलावा अगर आप भारत के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट कॉलेज IIM से एमबीए करते हैं तो आपको 10 लाख से 80 लाख रुपए तक का सैलरी पैकेज मिल सकता है। यहां पर सैलरी पैकेज से तात्पर्य ये है कि इतनी सैलरी साल भर में मिलती है।

संस्कृत में करियर कैसे बनाएं?

इसे सुनेंरोकेंवहीं आप कर्मकांडों को कराने के अलावा संस्कृत भाषा के अनुवादक, लेखक, शिक्षक के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। बड़े-बड़े मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पुजारी का कार्य भी कर सकते हैं। इसके अलावा शासकीय नौकरियों में भी शास्त्री और आचार्यों की भर्ती की जाती है। सेना में भी आप इसकी पढ़ाई करके सेवारत हो सकते हैं।

संस्कृत में ma कैसे करें?

आइए विस्तार से जानते हैं कि MA Sanskrit कैसे करें।…Sanskrit में MA कैसे करें?

Course MA Sanskrit
Full form Masters of Arts in Sanskrit
Duration 2 वर्ष

एमकॉम के बाद क्या कर सकते हैं?

इसे सुनेंरोकेंकरियर स्कोप (Career Scope): बीकॉम के बाद आप एक अकाउंटेंट (Accountant), बिज़नेस अनालीसिस्ट, ऑडिटर (Auditor), इकोनॉमिस्ट, फाइनेंस ऑफिसर, स्टॉक ब्रोकर, कंसलटेंट (Consultant) और बिजनेस प्लानर के तौर पर जॉब कर सकते हैं.

M Com के बाद b ED कितने साल का होता है?

इसे सुनेंरोकेंइस कोर्स को 12वीं कक्षा पास करने वाले छात्र कर सकते हैं यह कोर्स के समय अवधि 4 साल की है। इन 4 साल में आपको स्नातक की डिग्री भी मिलेगी और साथ ही साथ B. Ed कोर्स की डिग्री भी मिलेगी।

संस्कृत का टीचर बनने के लिए क्या करना पड़ता है?

इसे सुनेंरोकेंसंस्कृत अध्यापक बनने के लिए सबसे पहले आपको हाई स्कूल से ही संस्कृत सब्जेक्ट का चुनाव करें। इसके बाद 12वीं पास करने के बाद की उच्च शिक्षा संस्कृत विषय से कर सकते है। इसके बाद आप ग्रेजुएशन की पढ़ाई में भी संस्कृत विषय का चुनाव करें। इसके बाद आपको पोस्ट ग्रेजुएशन में भी संस्कृत विषय का चुनाव करना होगा।

हिस्ट्री में कैसे बनाएं बेहतरीन करियर

अगर आपमें अतीत को जानने की ललक है तो हिस्ट्री को अपना करियर बना सकते हैं. इतिहास में आपको हर काल से जुड़े राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक परिस्थिति के बारे में जानकारी दी जाती है.

archaeologist

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 मई 2015,
  • (अपडेटेड 11 मई 2015, 11:06 AM IST)

अगर आपमें अतीत को जानने की ललक है तो हिस्ट्री को अपना करियर बना सकते हैं. इतिहास में आपको हर काल से जुड़े राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक परिस्थिति के बारे में जानकारी दी जाती है. इतिहास में विषय से जुड़े जो भी कोर्स हैं, वे बारहवीं के बाद ही किए जाते हैं. आप हिस्ट्री में ग्रेजुशन कर सकते हैं. ग्रेजुएशन के बाद पीजी, एमफिल और पीएचडी भी कर सकते हैं. आप चाहें तो आर्कियोलॉजी, म्युजियोलॉजी और आर्काइवल स्टडीज में स्पेश्लाइजेशन भी कर सकते हैं.

कहां मिलेगी नौकरी
अगर आप हिस्ट्री में बीए और एमए कर लेते हैं तो आपको सरकारी नौकरी भी मिल सकती है. आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, सेना और सूचना प्रसारण मंत्रालय में काफी मौके होते हैं. अगर हिस्ट्री के साथ बिजनेस में भी रूचि है तो आपके लिए ऑक्शन हाउस में सेल्स, नीलामीकर्ता और शोधकर्ता के ऑप्शन भी हैं. इसके अलावा आप टीचिंग, पत्रकारिता, लाइब्रेरी, क्यूरेटर, आर्काइव्स, म्यूजियम, इंटरनेशनल आर्ग्नाइजेशन, हिस्ट्रोरिक सोसाइटीज, नेशनल पार्क सर्विसेज में नौकरी पा सकते हैं.

12वीं के बाद
बीए इन हिस्ट्री, एन्शिएंट हिस्ट्री, मिडुअल हिस्ट्री, मॉडर्न हिस्ट्री
बीए (ऑनर्स) हिस्ट्री

बीए के बाद

एमए इन हिस्ट्री, एंशिएंट हिस्ट्री, मिडुअल हिस्ट्री/मॉडर्न हिस्ट्री
एमएससी इन ग्लोबल हिस्ट्री, इकोनॉमिक हिस्ट्री

एम ए के बाद
एमफिल इन हिस्ट्री
पीएचडी इन एन्शिएंट हिस्ट्री

शॉर्ट टर्म कोर्स
नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया जैसी संस्थाएं भी कोर्स कराती हैं. जैसे आर्काइव मैनेजमेंट, रिकॉर्ड मैनेजमेंट, रेप्रोग्राफी, केयर एंड कंजरवेशन ऑफ बुक्स, मनुस्किप्ट्स एंड आर्काइव्स, सर्विस एंड रिपेयर ऑफ रिकॉर्ड्स, हैरिटेज मैनेजमेंट

सोशियोलॉजी से एमए करने वाले छात्रों के लिए करियर ऑप्शंस

हमें अपने पारंपरिक मूल्यों व बाहरी दुनिया के बीच संतुलन बनाने एवं व्यक्तिगत व सार्वजनिक क्रियाओं को पूरा करने के लिए तर्क संगत विचार सोशियोलॉजी के अध्ययन से आते हैं.

सोशियोलॉजी

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तथा समाज में ही अपना पूर्ण विकास कर पाता है. बिना समाज के मनुष्य अपने जीवन की परिकल्पना तक नहीं कर सकता है. समाज की सबसे छोटी इकाई है परिवार और मनुष्य के मानसिक,शारीरिक तथा आर्थिक विकास की प्रारंभिक शुरुआत उसके घर से ही होती है. जन्म से लेकर म्रत्यु पर्यंत मनुष्य किसी न किसी रूप में,रिश्तों की परिभाषा के साथ परिवार से जुड़ा रहता है. इसलिए समाज एक ऐसा घटक है जो मनुष्य को उन्नतशील तथा पतनशील दोनों ही मार्गों की तरफ उन्मुख करता है. इसलिए अगर किसी उम्मीदवार की रूचि सामाजिक गतिविधियों को जानने तथा उसकी छानबीन करने में है,तो सोशियोलॉजी उनके करियर के लिए एक बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है.

सोशियोलॉजी के अंतर्गत सामाजिक संरचना, रेस, कल्चर और सामाजिक परिवर्तन के बारे में मुख्य रूप से अध्ययन किया जाता है. वस्तुतः सोशियोलॉजी समाज में रहने वाले लोगों से जुड़ा हुआ विषय है और सीधे समाज से जुड़े होने के कारण आज के परिवेश में इसका महत्व बहुत अधिक हो गया है. आजकल तो इसे एमबीए के समकक्ष माना जाने लगा है.इसलिए इस विषय से मास्टर करने वाले उम्मीदवारों के लिए रोजगार की बहुत अधिक संभावनाएं एमए क्या है? हैं. व्यक्ति तथा उसकी रहन सहन तथा परिवेश के अध्ययन के कारण यह विषय बहुत रोचक भी है.आप सभी को पता है कि समाज की जीवन में अहम् भूमिका है और इसी समाज का अध्ययन इस विषय में किया जाता है.

मानव समाज के अध्ययन को ही सोशियोलॉजी अर्थात समाजशास्त्र कहा जाता है.भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार पूरी दुनिया में मनुष्य की सामाजिक संरचना भिन्न भिन्न है.इतना ही नही हर समाज की अपनी अलग अलग परम्पराएं भी हैं. आज के बदलते परिवेश की जरूरतों के अनुरूप सोशियोलॉजी के अंतर्गत चिकित्सा, सैन्य संगठन, जनसंपर्क और सामाजिक वैज्ञानिक ज्ञान का भी अध्ययन किया जाता है. आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रणालियों के सन्दर्भ में अगर देखें तो सोशियोलॉजी की शुरुआत भी पश्चिमी देशों से ही हुई है.

सोशियोलॉजी की विशिष्टता

सोशियोलॉजी यह जानने के लिए बहुत जरूरी है कि जिन परिस्थितियों में हम रह रहे हैं उसकी विसंगतियों को दूर कैसे किया जा सकता है ? इसी तरह यह हमें अपने पारंपरिक मूल्यों व बाहरी दुनिया के बीच संतुलन बनाने एवं व्यक्तिगत व सार्वजनिक क्रियाओं को पूरा करने के लिए तर्क संगत विचार सोशियोलॉजी के अध्ययन से आते हैं.वस्तुतः सभी तरह की नीतियों और रणनीतियों का संबंध मानव जीवन की प्रगति से ही जुड़ा होता है.इसलिए अगर करियर के लिहाज से देंखें तो इस विषय का महत्व स्वत: ही बढ़ जाता है. मानव सभ्यता, संस्कृति, समाज, जातीयता और सामाजिक संगठन आदि की जानकारी से हमें अपने वर्तमान को और अधिक बेहतर बनाने का मौका मिलता है.इन सभी विषयों के बारे में लोगों को शिक्षित कर उनका बेहतर समाजीकरण किया जा सकता है. इससे समाज में संस्कृति को संरक्षण मिलता रहता है.

सोशियोलॉजी का मुख्य उद्देश्य

  • सामाजिक विशिष्टताओं की पहचान कर मानवता को एकसूत्र में बांधने की कोशिश करना
  • सामाजिक जीवन में आ रहे परिवर्तनों की पहचान करना
  • समाज से अंधविश्वास एवं नकारात्मक प्रवृतियों को दूर करने का प्रयास करना.

सोशियोलॉजी से एमए करने वाले छात्रों के लिए रोजगार के अवसर

सोशियोलॉजी से एमए करने वाले छात्रों के लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है. शिक्षाजगत और गैर सरकारी संगठनों के साथ काम करने के अलावा वे प्रशासनिक सेवा, मीडिया और कारपोरेट घरानों में भी अपने लिए नौकरी तलाश सकते हैं. सोशल साइंस के विभिन्न विषयों में जॉब अवसर हाल के दिनों में बहुत अधिक बढ़ गए हैं.एमए के बाद प्रशासनिक सेवा और रिसर्च इंस्टीट्यूट में प्रवेश पाने के लिए सोशल साइंस सबसे बेहतर विषय साबित हो रहा है. मीडिया में भी इस विषय के जानकारों की काफी मांग है क्योंकि वे समाज और उससे जुड़ी घटनाओं को दूसरों की तुलना में बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और इन विषयों पर अपना पक्ष रखते हुए दर्शकों और पाठकों को उसके अनकहे पहलुओं से भी परिचित कराते हैं.सोशियोलॉजी के छात्र एनजीओ के साथ भी काम कर सकते हैं. इसके साथ ही वे समाज से जुड़े अन्य विषयों जैसे पर्यावरण, लिंगभेद आदि पर भी काम कर सकते हैं.इतना ही नहीं उनके लिए अध्यापन के क्षेत्र में भी काफी अच्छे अवसर हैं. राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान, राष्ट्रीय पुस्तकालय, संसदीय सेवाओं तथा सरकारी मंत्रालयों सहित विविध केंद्र सरकारी विभागों में भी इनके लिए रोजगार पाने के अच्छे अवसर मौजूद हैं.अगर जॉब प्रोफाइल की बात करें तो ये मुख्य रूप से सोशियोलॉजिस्‍ट,कम्यूनिटी ऑर्गेनाइजर,प्रोफेसर,लेक्चरर,कंसल्टेंट तथा काउंसलर के प्रोफाइल पर काम कर सकते हैं.

सोशियोलॉजी के अंतर्गत किये जाने वाले विभिन्न कोर्सेज

सोशियोलॉजी में बैचलर तथा मास्टर डिग्री कोर्स मौजूद हैं. किसी भी स्‍ट्रीम से 12वीं करने वाले छात्र आगे सोशियोलॉजी की पढ़ाई कर सकते हैं. इसके अलावा सोशियोलॉजी में एमफिल और पीएचडी भी की जा सकती है. सोशियोलॉजी के अंतर्गत मुख्यतः निम्नांकित विषयों को पढ़ाया जाता है -

  • इकॉनोमिक सोशियोलॉजी
  • पोलिटिकल सोशियोलॉजी
  • सोशियोलॉजी ऑफ किनशिप
  • अप्लाइड सोशियोलॉजी
  • सोशियोलॉजी ऑफ रिलीजन

सोशियोलॉजी का अध्ययन कराने वाली मुख्य भारतीय तथा विदेशी यूनिवर्सिटीज

भारत में

  • टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुंबई
  • यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद
  • यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान
  • बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी
  • यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास
  • पटना यूनिवर्सिटी
  • दिल्ली यूनिवर्सिटी
  • इलाहाबाद यूनिवर्सिटी
  • लखनऊ यूनिवर्सिटी
  • हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी, शिमला (हिप्र)
  • गवर्नमेंट कालेज धर्मशाला (हिप्र)
  • कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र
  • पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
  • जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली
  • बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल
  • देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय, इंदौर
  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़
  • मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई
  • जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
  • भारतीय सांख्यिकी संस्थान, बैंगलुरू

विदेश में

  • न्यूयार्क यूनिवर्सिटी
  • मिशिगन यूनिवर्सिटी
  • यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज
  • यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स

इस प्रकार हम देखते हैं कि सोशियोलॉजी में स्पेशलाइजेशन करने के बाद रोजगार की संभावनाएं काफी अधिक बढ़ जाती हैं. भारत में ही नहीं भारत से बाहर विदेशों में भी सोशियोलॉजी स्पेशलाइजेशन वाले उम्मीदवारों की बहुत अधिक मांग है.यूनिसेफ और रेडक्रॉस जैसी संस्थाएं समाजशास्त्र के विशेषज्ञों को काफी अच्छे पैकेज पर हायर करती हैं. अतः विदेशों में अपना करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह बेहतर विषय साबित हो सकता है.

सोशियोलॉजी से एमए करने वाले छात्रों की संभावित सैलरी
सोशियोलॉजी के फील्ड में सैलरी मुख्यतः इस बात पर निर्भर करती है कि आप ने सरकारी क्षेत्र में ज्वाइन किया है या प्राइवेट फील्ड में.आप अपने देश में ही रोजगार कर रहे हैं या फिर विदेश में किसी एनजीओ के साथ कार्यरत हैं. इस फील्ड में आरंभिक वेतन लगभग 15000 से 20000 हजार तक मिलने की उम्मीद होती है तथा आगे चलकर कार्य अनुभव और पद के अनुसार सैलरी बढ़ती जाती है.

रेटिंग: 4.70
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 529
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *