भारत में इक्विटी में व्यापार कैसे करें

कौन सी कंपनियां डिविडेंड देती हैं

कौन सी कंपनियां डिविडेंड देती हैं
हलाकि फिक्स्ड डिपॉजिट्स एक चुने हुए समय के लिए बेहतर इनकम देती है लेकिन अगर आप मुझे पूछेंगे तो मे फिर भी डिविडेंड देने वाले शेयर्स यनेकी डिविडेंड को ही ज्यादा पसंद करूँगा। और इसके पीछे २ कारन है

क्या होते हैं डिविडेंड यील्ड फंड, कोविड वाले साल में दिया 80 फीसदी रिटर्न

क्यों डिविडेंड(Dividend) वाले शेयर खरीदने चाहिए ? जानिए हिंदी मे

डिविडेंड के जरिये इनकम पाने का आसान तरीका है सबसे अच्छे शेयर खरीदकर उन्हें बोहोत लम्बे समय तक (१० साल या उससे ज्यादा ) होल्ड करना इससे जो कंपनी आज १ प्रतिशत डिविडेंड देती है वो १० साल मे १० गुना ज्यादा डिविडेंड देती है। उदाहरण के तौर पर समझते है।

  • जनवरी 2011 मे TCS के शेयर की प्राइस 579 थी और A ने 10 शेयर ख़रीदे
  • इसके अनुसार कुल शेयर की राशि हुई 5790 रुपये
  • उसके बाद A को 2012 मे TCS के शेयर से 8 रुपए प्रति शेयर डिविडेंड (DIVIDEND ) मिला
  • इसका मतलब कुल 80 रुपये का डिविडेंड मिला।

ऐसा समज लीजिये की A ने TCS के शेयर 2018 तक नहीं बचे और इसी दौरान TCS ने 1:1 बोनस शेयर भी दिए थे।

  • 2011 मे ख़रीदे 10 शेयर A के पास है और फिर उसको १:१ बोनस शेयर के कारन 5 शेयर और मिले और इसके कारन अब उसके शेयर हुए 15
  • और 2018 मे A को 29 रूपये प्रति शेयर डिविडेंड मिला।
  • इसका मतलब 15 शेयर का कुल डिविडेंड हुआ435 रुपये
  • 2011 को ख़रीदे गए इस शेयर पर TCS ने हर साल डिविडेंड दिया लेकिन सबसे बड़ी बात इन 6 सालो मे TCS के शेयर की कीमत 579 से बढ़कर 31 दिसंबर 2018 तक की जानकारी के अनुसार 1893.55 रुपये रही थी।
  • इसका मतलब 579 रुपये के 10 और 5 बोनस शेयर की कुल कीमत 2011 मे 8685 रुपये थी जो बढ़कर कुल 28403 रुपये हो गयी।

इसका मतलब साफ़ है की अगर आप अच्छे शेयर लम्बे समय तक होल्ड करेंगे तो आपको अच्छा डिविडेंड जरूर मिलेगा। और अगर शेयर घाटे मे भी होगा तब भी आपको डिविडेंड से आप भरपाई कर सकेंगे।

अच्छे डिविडेंड देने वाले शेयर कोनसे होते है ?

वैसे लगभग सभी कम्पनिया डिविडेंड देती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता की वो कंपनी अच्छी है। इसके लिए आपको २ बातो का ध्यान रखना चाहिए।

  1. रेगुलर डिविडेंड देनेवाली कंपनी
  1. डिविडेंड मे हर साल होने वाली बढ़ोतरी

लेकिन अच्छी डिविडेंड देनी वाली कंपनी खोजने के लिए आपको कंपनी के financial रिपोर्ट देखने चाहिए क्यों की हर कंपनी ग्रोथ के अनुसार डिविडेंड नहीं है।


कैसे पता करे अच्छे डिविडेंड देने वाले शेयर्स ?

वैसे देखा जाये तो डिविडेंड क्या होता है आसान भाषा मे डिविडेंड कंपनी के प्रॉफिट का हिस्सा होता है जो शेयर धारक मे बराबर मे बाटा जाता है। और स्वाभाविक है जो कंपनी ज्यादा प्रॉफिट कमाएगी वो डिविडेंड भी ज्यादा देगी। आप कोनसी कंपनी ग्रोथ मे आगे है अच्छा डिविडेंड आगे भी दे सकती है इसके बारे मे पता कर सकते है।

  1. सबसे पहले आप जिस कंपनी का शेयर लेना चाहते है उस कंपनी का प्रॉफिट लोस्स अकाउंट चेक कीजिये।
  2. उसके बाद आखिरी ५ साल के EPS चेक करना है।
  3. उसके बाद प्रति शेयर का डिविडेंड कितना है वो भी चेक करना है ५ साल मे वो कितना बढ़ा है वो भी चेक करना है।
  4. सबसे महत्वपूर्ण दोनों EPS और DIVIDEND पिछले ५ साल मे दोनों का फरक निकलना है। और अगर ईपीएस और डिविडेंड दोनों सामान है तो शेयर अच्छा हो सकता है क्यों की EPS बढ़ने का मतलब है कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़ना है।
  5. डिविडेंड मे बढ़ोतरी का मतलब है कंपनी डिविडेंड देने मे ज्यादा सक्रिय है।
  6. और दोनों सामान होने से कंपनी अगले कुछ सालो मे डिविडेंड को और भी बढ़ा सकती है।

डिविडेंड क्या होता है, कैसे मिलता है शेयरों में निवेश करने पर ज्यादा मुनाफा, समझें

डिविडेंड क्या होता है, कैसे मिलता है शेयरों में निवेश करने पर ज्यादा मुनाफा, समझें

Investment : कई कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स के डिविडेंड देती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आप कहीं एक जगह कौन सी कंपनियां डिविडेंड देती हैं पर बड़े अमाउंट में पैसे निवेश करते हैं तो यही उम्मीद रखते हैं कि आपको अच्छा खासा मुनाफा कौन सी कंपनियां डिविडेंड देती हैं होगा. मुनाफा एक की बजाय दो रास्तों से आए तो फिर बात ही क्या है. इसे कहते हैं डबल बेनिफिट वाली डील हासिल करना. कैपिटल मार्केट में ऐसे कई निवेश हैं जिनसे आप ऐसा फायदा उठा सकते हैं. कुछ ऐसी कंपनियां हैं जो अपने निवेशकों को अलग-अलग समय पर अपने मुनाफे में से डिविडेंड या लाभांश (Dividend) देती हैं. इनके शेयरों में निवेश कर निवेशक अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं. उससे पहले ये समझ लेना जरूरी है कि डिविडेंड क्या होता है.

यह भी पढ़ें

क्या होता है डिविडेंड?

शेयर मार्केट की दुनिया में कुछ ऐसी कंपनियां हैं जो अपने शेयरधारकों को समय-समय पर अपने मुनाफे में से हिस्सा देती हैं. मुनाफे के रूप में मिलने वाला यही हिस्सा डिविडेंड कहलाता है. ऐसी कंपनियों के शेयरों को डिविडेंड यील्ड स्टॉक्स कहा जाता है. हालांकि ये डिविडेंड देना या न देना किसी भी कंपनी का खुद का फैसला होता है. ये अनिवार्य नियम नहीं है. पीएसयू सेक्टर की कंपनियां अधिकतर अपने शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड देती हैं.

कैसे मिलेगा डबल मुनाफा?

किसी भी कंपनी के शेयर में निवेश कर मुनाफा कमाने के दो तरीके होते हैं. पहला फायदा आपको तब कौन सी कंपनियां डिविडेंड देती हैं होगा जब शेयरों में तेजी आएगी. और दूसरा यह कि कंपनी को जो भी मुनाफा हो रहा है, कंपनी उसी मुनाफे से आपको हिस्सा देगी. शेयरों में हमेशा उतार-चढ़ाव आता रहता है. जब बाजार गिरता है तो निवेशक अपने शेयर बेचने लगते हैं, इससे शेयरों के दाम घट जाते हैं. ऐसे वक्त में अगर आपने किसी डिविडेंड स्टॉक में निवेश कर रखा है तो आप ऐसे नुकसान के बीच में भी संभले रह सकते हैं.

कोरोना वाले साल में कैसा रहा प्रदर्शन?

कोरोना के उथल-पुथल वाले मार्केट में भी इन फंड्स ने 60 फीसदी के ऊपर के रिटर्न दिए हैं. वहीं 5 साल की अवधि में भी इनका CAGR 11 से 18 फीसदी के बीच रहा है.

मान लीजिए आपने आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल के डिविडेंड यील्ड फंड में एक साल पहले 10 हजार की SIP शुरू की होती तो आपकी ये रकम अब तक 1.54 लाख रुपये हो जाती. इसी तरह 1 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश 1.75 लाख रुपये हो चुका होता.

इनके अलावा, HDFC म्यूचुअल फंड ने भी दिसंबर 2020 में ही डिविडेंड यील्ड फंड लॉन्च किया है. इस फंड ने लॉन्च से अब तक 11.14 फीसदी का रिटर्न दिया है. इसका एक्सपेंस रेश्यो 0.37 फीसदी है. एक्सपेंस रेश्यो वो चार्ज है जो फंड हाउस आपसे मैनेजमेंट फीस के तौर पर लेता है.

Dividend Yield Funds, Mutual Funds, Investment Planning, Mutual Fund Performance, Equity Funds

पोर्टफोलियो में कौन सी कंपनियां शामिल?

इन फंड्स में वो शेयर हैं जिन्होंने अच्छे डिविडेंड दिए हैं. मसलन, HDFC डिविडेंड यील्ड फंड का 5.81 फीसदी निवेश HUL में है और 5.44 फीसदी इंफोसिस में है. इस फंड का ITC में 4.46 फीसदी एक्सपोजर है, जबकि TCS में 4.38 फीसदी निवेश है.

इनमें से HUL ने चौथी तिमाही के नतीजों के साथ ही 17 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड का ऐलान किया है. वहीं, इंफोसिस और TCS दोनों ने 15 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड का ऐलान किया है.

डिविडेंड यील्ड वाले इस NFO में भी लगा सकते हैं पैसे

पहले से लॉन्च होकर अपना प्रदर्शन दिखा चुके फंड्स आप चुन सकते हैं. हालांकि, इसी कैटेगरी का एक NFO भी अभी खुला हुआ है. फिलहाल टाटा डिविडेंड यील्ड का न्यू फंड ऑफर चल रहा है. ये NFO 17 मई तक खुला है.

इस NFO में न्यूनतम निवेश 5,000 रुपये का है. NFO के बाद लॉन्च होने के बाद फंड की NAV तय होगी. इस फंड के मैनेजर शैलेश जैन रहेंगे.

फंड की फैक्टशीट में दी गई जानकारी के मुताबिक ये फंड REITs, InvITs और विदेशी बाजार में भी निवेश कर सकता है.

क्या इनमें निवेश करना चाहिए?

सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर पंकज मलाडे मानते हैं कि इन फंड्स में जोखिम सीमित है क्योंकि इन्होंने उन्हीं कंपनियों में निवेश किया है जिन्होंने अपना प्रदर्शन और वैल्यू साबित की है.

उनका कहना है कि बाजार में SEBI के नियमों के बाद अभी कई तरह की कैटेगरी आ गई हैं. हालांकि ये भी किसी अन्य आम इक्विटी स्कीम जैसे ही है. निवेशक चाहें तो अपने लिए डायवर्सिफाइड और लार्जकैप फंड चुन सकते हैं.

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स इक्विटी फंड्स में लंबी अवधि के लिए पैसा लगाने की सलाह देते हैं.कौन सी कंपनियां डिविडेंड देती हैं

(Disclaimer: म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले जोखिम जरूर समझें, अपने एडवाइजर से सलाह लेने के बाद ही निवेश करें.)

Dividend KYA HOTA HAI

लाभांश शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है लाभ + अंश , लाभ का अंश,
इसको अगर हम Simple Language में समझे तो
किसी बिजनेस के मुनाफे को अपने हिस्सेदारो के बीच में शेयर करना
लेकिन जब कोई बिजनेस डिविडेंड देता है तो पूरे के पूरे मुनाफे को हिस्सेदारो के साथ में शेयर नहीं करता मुनाफे के एक छोटे से हिस्से को शेयर करता है अगर बिजनेस अपने पूरे के पूरे मुनाफे को हिस्सेदारों के साथ में शेयर कर देगा तो बिजनेस के पास खुद में री इन्वेस्ट करने के लिए कुछ नहीं बचेगा इसलिए मुनाफे के एक छोटे से हिस्से को ही हिस्सेदारो के साथ में शेयर किया जाता है
मान लो कि आपकी कोई कंपनी हो और आप अपने हिस्सेदारों के साथ में मुनाफे को शेयर करना चाहते हैं तो आप के के एक छोटे से हिस्से को ही शेयर करेंगे

ब्लू चिप कंपनी में किस को निवेश करना चाहिए

ब्लू चिप कंपनी सुरक्षित तथा कम जोखिम की होती है। लोगों को इसमें निवेश करना काफी पसंद है, विशेषकर उन निवेशकों को जो बाजार में अधिक जानकारी नहीं रखते। वह केवल कंपनी का नाम जानते हैं।

ऐसे लोग यहां से अपने अच्छे रिटर्न की उम्मीद करते हैं जो उन्हें एक निश्चित अवधि के बाद मिल भी जाता है।

हमारी सलाह के अनुसार उन सभी निवेशकों को यहां निवेश करना चाहिए जो अपने पूंजी के साथ अधिक जोखिम नहीं लेना चाहते। विशेषकर नए निवेशक जो मार्केट की अधिक समझ नहीं रखते हैं। उनके लिए यह कंपनियां सबसे बेहतर ऑप्शन है।

क्या ब्लू चिप वाली कंपनी डूबती या धोखा देती है

बाजार सदैव जोखिम भरा होता है, चाहे बाजार में कितनी ही बड़ी कंपनी क्यों ना हो, जोखिम तो अवश्य ही रहता है। बड़ी कंपनियां भी कई बार ठीक मैनेजमेंट या कुशल कारीगर, विपरीत परिस्थितियां आदि के कारण बर्बाद हो जाती है। रिलायंस कंपनी जो आज नामी कंपनी है। यह भी एक समय बाढ़ और अन्य परिस्थितियों के कारण बर्बादी के कगार पर थी। किंतु कुशल नेतृत्व ने इस कंपनी को नया जीवन दिया।

अनेकों ऐसी कंपनियां है जो कभी नामी कंपनी हुआ करती थी।

आज उसका अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। ऐसे में आप नामी कंपनी पर भरोसा तो कर सकते हैं, किंतु उसकी नियमित कार्यशैली और अर्धवार्षिक वार्षिक रिपोर्ट का अध्ययन करते रहे, जिससे आपके निवेश सुरक्षित रहें।

यह भी कौन सी कंपनियां डिविडेंड देती हैं पढ़ें

निष्कर्ष

उपरोक्त लेख में हमने जाना ब्लू कंपनी नाम कैसे प्रचलन में आया? किन कंपनियों को ब्लूचिप कहा जाता है? तथा यह बाजार में किस प्रकार से कार्य करता है? इस कंपनी में किस प्रकार के निदेशकों को आना चाहिए? तथा यह कितना मुनाफा देती है? अन्य विषयों पर विस्तार से हमने जानने का प्रयास किया। आपको बाजार में निवेश करते समय सदैव जागरूक रहना होगा। चाहे कंपनी का चयन हो या अपने मुनाफे घाटे के प्रति सतर्कता। आपकी पूंजी आपके लिए जीवन को दिशा देने का कार्य करती है।

अतः इस पूंजी के प्रति आप सतर्कता से व्यवहार करें तभी यह आपको अधिक मुनाफा देने का कार्य करेगी। निवेश करते समय आपको कुशल सलाह लेने की आवश्यकता होती है। बाजार में मिल रही सलाह जरूरी नहीं कि आपके लिए ठीक हो इसलिए सभी सलाह का स्वागत करते हुए अपना निर्णय स्वतंत्र हो कर ले यह आपको वित्तीय घाटे से बचा सकती है।

रेटिंग: 4.27
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 98
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *