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वित्तीय प्रणाली की महत्व

वित्तीय प्रणाली की महत्व
Photo:INDIA TV 'पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करना बड़ी भूल', जानें वजह

संपादकीय : जी-20 सम्मेलन

मंगलवार से इंडोनेशिया के बाली द्वीप में शुरू हुए जी-20 सम्मेलन में समूह की अध्यक्षता कर रहे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर रूस -यूक्रेन युद्ध को रोके जाने का मुद्दा उठाया है। भारत को इस सम्मेलन की अध्यक्षता ऐसे समय मिली है जब दुनिया सदी में एक बार होने वाली महामारी, संघर्षों के साथ ढेर सारी आर्थिक अनिश्चितताओं के विघटनकारी प्रभावों से गुजर रही है। आज एक ओर जहाँ रूस-यूक्रेन युद्ध से उपजी तमाम समस्याएं हैं तो दूसरी तरफ विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच जबर्दस्त तनातनी चल रही है, ऐसे में इस समिट का महत्व और बढ़ गया है।

जी-20 समूह वैश्विक जीडीपी के 85 फीसदी, वैश्विक व्यापार के 75 फीसदी और वैश्विक जनसंख्या के 60 फीसदी वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। पिछले कुछ वर्षों में इसके विचार-विमर्श के एजेंडे का विस्तार हुआ है। वैश्विक वित्तीय प्रणाली और आर्थिक विकास के अलावा जी 20 देशों का समूह जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, बुनियादी ढांचे, निवेश, ऊर्जा, रोजगार, भ्रष्टाचार, कृषि, नवाचार आदि मुद्दों पर भी चिंतित है। हालांकि द्विपक्षीय विवाद और आंतरिक राजनीतिक घटनाक्रम गैर-सरकारी क्षेत्र हैं, लेकिन सम्मेलन में भाग लेने वाले नेता ऐसे मुद्दों पर ध्यान देते हैं।

जी-20 शिखर सम्मेलन का लोगो लॉन्च करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा, जी-20 लोगो में कमल का प्रतीक अभी आशा का प्रतिनिधित्व करता है। ज्ञात हो कि भारत सहित दुनिया के कुछ देशों ने सम्मेलन का लोगो कमल रखे जाने पर आपत्तियां की थीं, क्योंकि यह भारतीय जनता पार्टी का चुनाव चिन्ह है। हालांकि भारतीय संस्कृति में ज्ञान और समृद्धि, दोनों की देवी कमल पर विराजमान हैं। फिलहाल यह सही है कि इस समय पूरी दुनिया बहुत बड़े आर्थिक संकट से गुजर रही है। जी-20 में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के संबंध तनावपूर्ण हैं, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर मतभेद हैं और दोनों वैश्विक प्रभुत्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विवाद का एक प्रमुख कारण ताइवान रहा है। अमेरिकी कांग्रेस के अध्यक्ष, नैन्सी पेलोसी और अन्य अमेरिकी सांसदों के ताइवान दौरे ने तनाव को बढ़ा दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन, जिन्होंने चीन और रूस को अमेरिका का रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी कहा है, चीन को मात देना चाहते हैं और गंभीर प्रतिबंधों के साथ रूसी अर्थव्यवस्था को पंगु बनाना चाहते हैं। यूक्रेन अकेला ऐसा मुद्दा नहीं है, जिस पर वह सहमत नहीं हैं। जी 20 के अधिकांश सदस्यों का मानना है कि खाद्यान्न, उर्वरक, तेल और गैस की मौजूदा कमी और कीमतों एवं मुद्रास्फीति में भारी वृद्धि के लिए यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत की चीन के साथ अपनी समस्याएं हैं, जिसमें गलवान घाटी में चीनी आक्रामकता और पाकिस्तान को समर्थन शामिल है।

दुनिया को एक साथ लाने की बात कहना आसान है, पर ऐसा होना मुश्किल ही है। एक ओर सामरिक युद्ध और अर्थव्यवस्थाओं की जंग, दूसरी ओर विश्व में लोकतंत्र की भावनाओं पर कुठाराघात, इससे आम आदमी के लिए खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है। न वित्तीय प्रणाली की महत्व तो पर्यावरण को लेकर सहमति बन पा रही है और न ही दुनिया आर्थिक संकटों के निवारण को लेकर सही दिशा में चल पा रही है। फिर भी दुनिया को जी20 समूह की इस बैठक से बहुत उम्मीदें हैं कि दुनिया के बड़े और महत्वपूर्ण देश मौजूदा संकटों का कोई हल निकालने में कामयाब होंगे।

अटल पेंशन योजना

मुख्य पृष्ठ

भारत सरकार का सह योगदान वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 के लिए यानी 5 साल के लिए उन ग्राहकों को उपलब्ध है जो 1 जून, 2015 से 31 मार्च, 2016 की इस अवधि के दौरान इस योजना में शामिल होते हैं और जो किसी भी वैधानिक और सामाजिक सुरक्षा योजना में शामिल नहीं हैं एवं आयकर दाताओं में शामिल नहीं हैं। सरकार का सह-योगदान पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा पात्र स्थायी सेवानिवृत्ति खाता पेंशन संख्या को केंद्रीय रिकार्ड एजेंसी से ग्राहक द्वारा वर्ष के लिए सभी किस्तों का भुगतान की पुष्टि प्राप्त करने के बाद वित्तीय वर्ष के अंत में लिए ग्राहक के बचत बैंक खाता/डाकघर बचत बैंक खाते में कुल योगदान का 50% या 1000 रुपये का एक अधिकतम अंशदान जमा किया जाएगा। वैसे लाभार्थी जो वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत आते हैं, एपीवाई के तहत सरकार के सह-योगदान प्राप्त करने के पात्र नहीं हैं। उदाहरण के लिए, निम्नलिखित अधिनियमों के तहत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के सदस्य एपीवाई के तहत सरकार के सह-योगदान प्राप्त करने के लिए पात्र नहीं हो सकते है:

    और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952
  • कोयला खान भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1948
  • असम चाय बागान भविष्य निधि और विविध प्रावधान, 1955
  • नाविक भविष्य निधि अधिनियम, 1966
  • जम्मू-कश्मीर कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1961
  • कोई भी अन्य वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना

अटल पेंशन योजना के तहत न्यूनतम पेंशन की इस अर्थ में सरकार द्वारा की गारंटी होगी कि यदि पेंशन योगदान पर वास्तविक रिटर्न अंशदान की अवधि के दौरान कम हुआ तो इस तरह की कमी को सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा। दूसरी ओर, यदि पेंशन योगदान पर वास्तविक रिटर्न न्यूनतम गारंटी पेंशन के लिए योगदान की अवधि में रिटर्न की तुलना में अधिक हैं तो इस तरह के अतिरिक्त लाभ ग्राहक के खाते में जमा किया जायेगा जिससे ग्राहकों को बढ़ा हुआ योजना लाभ मिलेगा।

सरकार कुल योगदान का 50% या 1000 रुपये प्रति साल जो भी कम हो का सह-योगदान प्रत्येक पात्र ग्राहक को करेगी जो इस योजना में 1 जून 2015 से 31 मार्च 2016 के बीच शामिल वित्तीय प्रणाली की महत्व होते हैं और जो किसी भी अन्य सामाजिक सुरक्षा योजना के एक लाभार्थी नहीं है एवं आयकर दाता नहीं है। सरकार के सह-योगदान वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक 5 साल के लिए दिया जाएगा।

वर्तमान में, नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत ग्राहक योगदान एवं उसपर निवेश रिटर्न के लिए के लिए कर लाभ पाने के पात्र है। इसके अलावा, एनपीएस से बाहर निकलने पर वार्षिकी की खरीद मूल्य पर भी कर नहीं लगाया जाता है और केवल ग्राहकों की पेंशन आय सामान्य आय का हिस्सा मानी जाती है उसपर ग्राहक के लिए लागू उचित सीमांत दर लगाया जाता है। इसी तरह के कर उपचार एपीवाई के ग्राहकों के लिए लागू है।

खाता खोलने के लिए प्रक्रिया

  • बैंक शाखा/पोस्ट ऑफिस जहां व्यक्ति का बचत बैंक है को संपर्क करें या यदि खाता नही है तो नया बचत खाता खोलें
  • बैंक/डाकघर बचत बैंक खाता संख्या उपलब्ध करायें और बैंक कर्मचारियों की मदद से एपीवाई पंजीकरण फार्म भरें
  • आधार/मोबाइल नंबर उपलब्ध कराएं । यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन योगदान के बारे में संचार की सुविधा हेतु प्रदान की जा सकती है।
  • मासिक/तिमाही/छमाही योगदान के हस्तांतरण के लिए बचत बैंक खाता/डाकघर बचत बैंक खाते में आवश्यक राशि रखना सुनिश्चित करें

योगदान की विधि, कैसे योगदान करें और योगदान की नियत तारीख

निरंतर चूक के मामले में

ग्राहकों को अपने बचत बैंक खातों/डाकघर बचत बैंक खाते में निर्धारित नियत दिनांक देरी योगदान के लिए किसी भी अतिदेय ब्याज से बचने के लिए पर्याप्त राशि रखनी चाहिए। मासिक/तिमाही/छमाही योगदान बचत बैंक खाता/डाकघर बचत बैंक खाते में महीने/तिमाही/छमाही की पहली तारीख को जमा किया जा सकता है। हालांकि, अगर ग्राहक के बचत बैंक खाते/डाकघर बचत बैंक खाते में पहले महीने के अंतिम दिन/पहले तिमाही के अंतिम दिन/ पहले छमाही के अंतिम अपर्याप्त शेष है तो इसे एक डिफ़ॉल्ट माना जायेगा और देरी से योगदान के लिए अतिदेय ब्याज के साथ अगले महीने में भुगतान करना होगा। बैंकों को प्रत्येक देरी मासिक योगदान के लिए प्रत्येक 100 रुपये में देरी के 1 रुपये प्रति माह शुल्क लेना है। योगदान की तिमाही/छमाही मोड के लिए देरी योगदान के लिए अतिदेय ब्याज के हिसाब से वित्तीय प्रणाली की महत्व वसूल किया जाएगा। एकत्र बकाया ब्याज की राशि ग्राहक के पेंशन कोष के हिस्से के रूप में रहेगा। एक से अधिक मासिक/तिमाही/छमाही योगदान धन की उपलब्धता के आधार पर लिया जा सकता है। सभी मामलों में, योगदान यदि कोई हो अतिदेय राशि के साथ-साथ जमा किया जा सकता है। यह बैंक की आंतरिक प्रक्रिया होगी। देय राशि की वसूली खाते में उपलब्ध धन के अनुसार की जाएगी।

रखरखाव शुल्क और अन्य संबंधित शुल्कों के लिए ग्राहकों के खाते से कटौती एक आवधिक आधार पर किया जाएगा। उन ग्राहकों के लिए जिन्होंनें सरकार के सह-योगदान का लाभ उठाया है के लिए, खाते की राशि शून्य माना जाएगा जब ग्राहक कोष एवं सरकार के सह-योगदान खाते से घटाने पर राशि रखरखाव शुल्क, फीस और अतिदेय ब्याज के बराबर हो जाये और इसलिए शुद्ध कोष शून्य हो जाता है । इस मामले में सरकार का सह अंशदान सरकार को वापस दिया जाएगा।

Financial Stability and Development Council (FSDC)

fsdc

Science and Technology Current Affairs

November 19, 2022

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महत्वपूर्ण विषयों, तैयारी युक्तियों और रणनीतियों की जाँच करें

महत्वपूर्ण विषयों, तैयारी युक्तियों और रणनीतियों की जाँच करें

एसबीआई सीबीओ तैयारी रणनीति 2022: भारतीय स्टेट बैंक 4 दिसंबर 2022 को एसबीआई सर्कल आधारित अधिकारी परीक्षा आयोजित करने जा रहा है। जिन उम्मीदवारों ने एसबीआई सीबीओ 2022 के लिए आवेदन किया है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे एसबीआई सीबीओ तैयारी के सुझावों पर टिके रहें, जैसा कि विशेषज्ञों ने पहली बार में परीक्षा को क्रैक करने के लिए सुझाव दिया था। कोशिश करना। अधिसूचना के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक में सर्कल आधारित अधिकारी की लगभग 1422 रिक्तियों को बैंक द्वारा सूचित किया गया है।

SBI CBO 2022 चयन प्रक्रिया में एक ऑनलाइन लिखित परीक्षा, स्क्रीनिंग और साक्षात्कार शामिल होगा। एसबीआई सीबीओ के लिए ऑनलाइन लिखित परीक्षा में एक वस्तुनिष्ठ और वर्णनात्मक परीक्षा शामिल होगी। उम्मीदवारों को परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए दोनों वर्गों के लिए अर्हता प्राप्त करनी होगी। लिखित परीक्षा और स्क्रीनिंग राउंड क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों को इंटरव्यू राउंड में उपस्थित होने के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम चयन के लिए विचार किए जाने के लिए उम्मीदवारों को साक्षात्कार में न्यूनतम अर्हक अंक प्राप्त करने होंगे।

'पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करना बड़ी भूल', ऐसा करना भारत के विकास दर में बनेगा बड़ी रुकावट? जानें वजह

कुछ राज्यों में पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जा चुकी है तो वहीं बाकि राज्यों में इसे लागू करने की मांग भी हो रही है। अगर इसे सभी राज्यों में लागू किया जाता है तो इससे भारत के अर्थव्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ेगा? इसके बारे में अर्थशास्त्रियों ने विस्तार से जानकारी दी है।

Vikash Tiwary

Edited By: Vikash Tiwary @ivikashtiwary
Updated on: November 13, 2022 19:04 IST

'पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करना बड़ी भूल', जानें वजह- India TV Hindi News

Photo:INDIA TV 'पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करना बड़ी भूल', जानें वजह

भारत में काफी समय से पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करने की मांग की जा रही है। हाल ही में कुछ राज्यों ने इसे लागू किया है तो कुछ राज्यों में नई सरकार आने पर पुराने पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) को वापस से शुरु करने की बात कही गई है। इस बात की घोषणा के बीच अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इसके लिये वित्तीय संसाधनों का उपयोग करना एक ‘बड़ी भूल’ होगी और इससे औसत आर्थिक वृद्धि दर घटकर छह प्रतिशत पर आने के साथ अन्य विकास कार्यों पर भी असर पड़ेगा।

अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) लागू होने से सरकारी क्षेत्र में काम करने वाले नौकरीपेशा लोगों को ही लाभ होगा जो आबादी का एक सीमित हिस्सा ही है। वहीं निजी क्षेत्र में बड़ी संख्या में काम करने वाले कामगारों समेत तमाम लोगों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलना चाहिए।

इन राज्यों ने हाल ही में इसे लागू करने का किया था ऐलान

उन्होंने ओपीएस से नई नौकरियों के लिए मौके मिलने पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई है। पिछले कुछ महीनों में राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और पंजाब ने सरकारी कर्मचारियों के लिये ओपीएस को लागू करने की घोषणा की है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश और गुजरात में जारी विधानसभा चुनावों के दौरान कहा है कि इन राज्यों में सत्ता में आने पर वह ओपीएस लागू करेगी। इससे पहले उत्तर प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव में वित्तीय प्रणाली की महत्व भी यह मुद्दा जोरशोर से उठा था।

'भारत के विकास दर में आएगी गिरावट'

जाने-माने अर्थशास्त्री और वर्तमान में बेंगलुरु स्थित डॉ.बीआर आंबेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स यूनिवर्सिटी के कुलपति एन आर भानुमूर्ति ने कहा, ‘‘नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) विभिन्न स्तरों पर काफी सोच-विचार कर लागू की गई है और यह स्वतंत्र भारत में सबसे बड़ा राजकोषीय सुधार है। इससे सरकार का वित्तीय बोझ काफी कम हुआ है और राज्य सरकारों की राजकोषीय स्थिति भी बेहतर हुई है। अगर ओपीएस पूरे देश में लागू कर दी गई तो इसका वित्तीय असर काफी व्यापक होगा। सार्वजनिक कर्ज का स्तर प्रबंधन-योग्य स्तर से ऊपर पहुंच जाएगा। इतना ही नहीं, औसत जीडीपी वृद्धि दर पर भी असर पड़ेगा और सात प्रतिशत से अधिक वृद्धि की संभावना घटकर छह प्रतिशत पर आ सकती है।’’

'लागू करने की गुंजाइश नहीं दिखती'

आर्थिक शोध संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में प्रोफेसर लेखा चक्रवर्ती ने कहा कि चुनावों में मतदाताओं को लुभाने के लिए ओपीएस लागू करना आर्थिक नजरिये से नुकसानदायक है क्योंकि इसमें वित्तीय जोखिम है। इस घोषणा का समय भी विशेष रूप से महामारी के बाद के राजकोषीय जोखिम और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए अनुचित है। राजकोषीय बाधाओं को देखते हुए ओपीएस को वापस से लागू करने की गुंजाइश नहीं दिखती है। अगर कोई सरकार इसे लागू करती है तो वह एक बड़ी गलती करने जा रही है।

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