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टैक्स रिक्लेम क्या हैं

टैक्स रिक्लेम क्या हैं
कुल मिलाकर करीब सवा लाख भवनों पर टैक्स लगा हुआ है, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में अब तक करीब 70 हजार भवनों से ही टैक्स वसूली हो पाई है। हाउस टैक्स नगर निगम के राजस्व का बड़ा साधन है और इसकी वसूली न होने से निगम अधिकारी चिंतित हैं। नगर निगम हर साल टैक्स वसूली के लिए सभी वार्डों में कैंप लगाता था, लेकिन कोरोना के कारण कैंप भी नहीं लग पाए। वर्तमान में निगम की ओर से टैक्स में 20 प्रतिशत छूट दी जा रही। पहले इसकी अंतिम सीमा 31 दिसंबर थी, जिसे महापौर ने 28 फरवरी कर दिया था। आज इस सीमा का अंतिम दिन है।

अगर एक ही वित्तीय वर्ष में नौकरी बदली है तो यकीनन दो फॉर्म 16 की मदद से कुल टीडीएस कैलकुलेट करना होगा. ये दोनों फॉर्म 16 अलग-अलग संस्थानों से आएगा, एक जहां पहले काम करते थे और एक जहां अभी काम करते हैं.

अगर बदली है नौकरी तो ITR फाइल करने से पहले ध्यान दें..

होम -> इकोनॉमी टैक्स रिक्लेम क्या हैं

साल का वो समय शुरू हो गया है जब हर जगह टैक्स रिटर्न भरने और टैक्स से जुड़े काम करने की बातें शुरू हो गई टैक्स रिक्लेम क्या हैं हैं. हममे से कई लोगों के लिए ये समस्या बहुत बड़ी हो जाती है और किसी न किसी फाइनेंशियल एक्सपर्ट की मदद लेने की बात की जाती है. असली समस्या आती है नौकरी पेशा लोगों को, वो लोग जो साल में एक या एक से ज्यादा बार नौकरी बदल चुके होते हैं उनके लिए तो दो फॉर्म 16 जुटाना और एक स्टेप ज्यादा पूरा करना एक कठिन काम लगता है, पर असल में ये इतना भी मुश्किल नहीं है.

अगर एक ही वित्तीय वर्ष में नौकरी बदली है तो यकीनन दो फॉर्म 16 की मदद से कुल टीडीएस कैलकुलेट करना होगा. ये दोनों फॉर्म 16 अलग-अलग संस्थानों से आएगा, एक जहां पहले टैक्स रिक्लेम क्या हैं काम करते थे और एक जहां अभी काम करते हैं.

फॉर्म 16 में बेसिक सैलरी, सभी भत्ते और टैक्स साल में कितना कटा है इसकी टैक्स रिक्लेम क्या हैं डिटेल्स दी होती हैं.

अगर नौकरी बदली है तो क्या देखें?

1. इन्वेस्टमेंट डिक्लेरेशन..

अगर नौकरी बदल चुके हैं तो इस बात का ध्यान दें कि सारे डिडक्शन यानी कटौतियां साल में एक बार ही की गई हों. दो जगह नौकरी करने का मतलब ये नहीं कि साल में दो बार टैक्स डिडक्शन हों. इसी के साथ, टैक्स डिपार्टमेंट के लिए सभी तरह टैक्स रिक्लेम क्या हैं के प्रूफ भी रखने होते हैं.

पहले वाली कंपनी और नई कंपनी को एक ही तरह का इन्वेस्टमेंट डिक्लेरेशन दिया है और पहले की सैलरी बताना भूल गए हैं तो यकीनन आपको अपना टैक्स अमाउंट की गणना फिर से करनी होगी. इससे डुप्लिकेशन नहीं होगा. ध्यान रखें कि जितनी भी इन्वेस्मेंट की गई है उसका प्रूफ जरूर होना चाहिए.

2. टैक्स स्लैब टैक्स रिक्लेम क्या हैं में बदलाव का ध्यान रखें..

अगर आपकी सैलरी में बदलाव हुआ है जैसा की अक्सर होता है किसी नई जगह में नौकरी करने पर तो अपना टैक्स स्लैब जरूर चेक कर लें. अगर ये बदल गया है तो टैक्स की गणना दोबारा से करनी होगी और देनदारी बढ़ जाएगी.

अगर फॉर्म 16 नहीं है तो?

ऐसा भी हो सकता है कि आपके पास फॉर्म 16 न हो और आपको फिर भी टैक्स रिटर्न फाइल करने हों. ऐसा मुमकिन है. हालांकि, इसके लिए थोड़ी मेहनत जरूर करनी होगी.

1. अपनी टैक्सेबल सैलरी की गणना करने के लिए वित्तीय वर्ष की सभी पेस्लिप (अगर नौकरी बदली है तो पूर्व और अभी दोनों कंपनियों की पे स्लिप) के जरिए टैक्स कैल्कुलेट करें.

2. फॉर्म 16 के न होने पर फॉर्म 26AS काम आता है और इसमें टीडीएस की सारी डिटेल्स होते हैं.

3. अगली स्टेप होती है टैक्स डिडक्शन की. वो सभी टैक्स डिडक्शन जिनके लिए आप मान्य हैं जैसे सेक्शन 80C और 80D. इसमें फुल टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट जैसे ELSS, PPF, होम लोन आदि कि डिटेल्स दी जाएं और इसके सभी जरूरी दस्तावेज भी पास में हो.

4. डिडक्शन के बाद आपको वो इनकम देखनी होगी जो सैलरी के अलावा मिली हैं जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर्स या म्यूचुअल फंड की इनकम आदि.

अगर बदली है नौकरी तो ITR फाइल करने से पहले ध्यान दें..

होम -> इकोनॉमी

साल का वो समय शुरू हो गया है जब हर जगह टैक्स रिटर्न भरने और टैक्स से जुड़े काम करने की बातें शुरू हो गई हैं. हममे से कई लोगों के लिए ये समस्या बहुत बड़ी हो जाती है और किसी न किसी फाइनेंशियल एक्सपर्ट की मदद लेने की बात की जाती है. असली समस्या आती है नौकरी पेशा लोगों को, वो लोग जो साल में एक या एक से ज्यादा बार नौकरी बदल चुके होते हैं उनके लिए तो दो फॉर्म 16 जुटाना और एक स्टेप ज्यादा पूरा करना एक कठिन काम लगता है, पर असल में ये इतना भी मुश्किल नहीं है.

अगर एक ही वित्तीय वर्ष में नौकरी बदली है तो यकीनन दो फॉर्म 16 की मदद से कुल टीडीएस कैलकुलेट करना होगा. ये दोनों फॉर्म 16 अलग-अलग संस्थानों से आएगा, एक जहां पहले काम करते थे और एक जहां अभी काम करते हैं.

फॉर्म 16 में बेसिक सैलरी, सभी भत्ते और टैक्स साल में कितना कटा है इसकी डिटेल्स दी होती हैं.

अगर नौकरी बदली है तो क्या देखें?

1. इन्वेस्टमेंट डिक्लेरेशन..

अगर नौकरी बदल चुके हैं तो इस बात का ध्यान दें कि सारे डिडक्शन यानी कटौतियां साल में एक बार ही की गई हों. दो जगह नौकरी करने का मतलब ये नहीं कि साल में दो बार टैक्स डिडक्शन हों. इसी के साथ, टैक्स डिपार्टमेंट के लिए सभी तरह के प्रूफ भी रखने होते हैं.

पहले वाली कंपनी और नई कंपनी को एक ही तरह का इन्वेस्टमेंट डिक्लेरेशन दिया है और पहले की सैलरी बताना भूल गए हैं तो यकीनन आपको अपना टैक्स अमाउंट की गणना फिर से करनी होगी. इससे डुप्लिकेशन नहीं होगा. ध्यान रखें कि जितनी भी इन्वेस्मेंट की गई है उसका प्रूफ जरूर होना चाहिए.

2. टैक्स स्लैब में बदलाव का ध्यान रखें..

अगर आपकी सैलरी में बदलाव हुआ है जैसा की अक्सर होता है किसी नई जगह में नौकरी करने पर तो अपना टैक्स स्लैब जरूर चेक कर लें. अगर ये बदल गया है तो टैक्स की गणना दोबारा से करनी होगी और देनदारी बढ़ जाएगी.

अगर फॉर्म 16 नहीं है तो?

ऐसा भी हो सकता है कि आपके पास फॉर्म 16 न हो और आपको फिर भी टैक्स रिटर्न फाइल करने हों. ऐसा मुमकिन है. हालांकि, इसके लिए थोड़ी मेहनत जरूर करनी होगी.

1. अपनी टैक्सेबल सैलरी की गणना करने के लिए वित्तीय वर्ष की सभी पेस्लिप (अगर नौकरी बदली है तो पूर्व और अभी दोनों कंपनियों की पे स्लिप) के जरिए टैक्स कैल्कुलेट करें.

2. फॉर्म 16 के न होने पर फॉर्म 26AS काम आता है और इसमें टीडीएस की सारी डिटेल्स होते हैं.

3. अगली स्टेप होती है टैक्स डिडक्शन की. वो सभी टैक्स डिडक्शन जिनके लिए आप मान्य हैं जैसे सेक्शन 80C और 80D. इसमें फुल टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट जैसे ELSS, PPF, होम लोन आदि कि डिटेल्स दी जाएं और इसके सभी जरूरी दस्तावेज भी पास में हो.

4. डिडक्शन के बाद आपको वो इनकम देखनी होगी जो सैलरी के अलावा मिली हैं जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर्स या म्यूचुअल फंड की इनकम आदि.

हाउस टैक्स में छूट का आज अंतिम दिन, आचार संहिता के चलते आगे नहीं बढ़ सकेगी छूट की समय सीमा

हाउस टैक्स में मिलने वाली बीस प्रतिशत छूट का आज अंतिम दिन है।

जागरण संवाददाता, देहरादून : हाउस टैक्स में मिलने वाली बीस प्रतिशत छूट का आज अंतिम दिन है। इसके बाद पूरा टैक्स जमा कराना होगा। नगर निगम ने आमजन को छूट का लाभ लेने के लिए 28 फरवरी तक का समय दिया हुआ है। चूंकि, प्रदेश में चुनाव की आचार संहिता प्रभावी है और इस स्थिति में महापौर सुनील उनियाल गामा छूट की सीमा आगे बढ़ाने का निर्णय नहीं ले सकते। इस पर केवल शासन निर्णय ले सकता है, लेकिन शासन में फिलहाल संशय की स्थिति है। लिहाजा, आज के बाद आमजन को पूरा टैक्स जमा कराना होगा।

प्रो. डीआर पुरोहित को राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की गई है।

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