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डायरेक्ट के साथ निवेश और व्यापार

डायरेक्ट के साथ निवेश और व्यापार
नवंबर 2021 में आरबीआई ने इस प्लेटफार्म को शुरू किया है। (फोटो: रॉयटर्स)

फॉरेन इंवेस्टर्स की भारत में निवेश में रुचि घटी, अप्रैल-दिसंबर 2021 में FDI इक्विटी फ्लो घटा, जानें कितनी आई गिरावट

भारत के विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश में पिछले साल कमी देखी गई है. फॉरेन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट के तहत इक्विटी फ्लो में अप्रैल-दिसंबर के दौरान पूरे 16 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

By: पीटीआई | Updated at : 27 Feb 2022 02:06 PM (IST)

Edited By: Meenakshi

एफडीआई इक्विटी फ्लो घटाः देश में चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-दिसंबर के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) इक्विटी प्रवाह 16 फीसदी घटकर 43.17 अरब डॉलर रहा.
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने अपने आंकड़ों में यह जानकारी दी. इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान देश में एफडीआई इक्विटी प्रवाह 51.47 अरब डॉलर था.

एफडीआई फ्लो के आंकड़ों में देखी जा रही है गिरावट
वही चालू वित्त वर्ष के शुरूआती नौ महीने के दौरान कुल एफडीआई प्रवाह 60.34 अरब डॉलर का रहा. इसमें इक्विटी प्रवाह, आय का फिर से निवेश करना और अन्य पूंजी शामिल है. इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 67.5 अरब डॉलर था.

साल दर साल आंकड़ों में आ रही है गिरावट
आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान भी इक्विटी प्रवाह घटकर 12 अरब डॉलर रह गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 21.46 अरब डॉलर था. इस दौरान कुल एफडीआई प्रवाह 17.94 अरब डॉलर रहा जो इससे पूर्व वित्त वर्ष 2020-21 की इसी तिमाही में 26.16 अरब डॉलर था.

सिंगापुर रहा टॉप पर, अन्य देशों का भी हाल जानें
सिंगापुर अप्रैल-दिसंबर 2021 के दौरान 11.7 अरब डॉलर के निवेश के साथ शीर्ष स्थान पर रहा. वही अमेरिका से इस अवधि के दौरान 7.52 अरब डॉलर, मॉरीशस से 6.58 अरब डॉलर, केमैन आइलैंड्स से 2.74 अरब डॉलर, नीदरलैंड से 2.66 अरब डॉलर और ब्रिटेन से 1.44 अरब डॉलर का निवेश आया आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में सर्वाधिक 10.25 अरब डॉलर एफडीआई कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र में आया.

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Published at : 27 Feb 2022 02:05 PM (IST) Tags: Stock Market Foreign Direct Investment Rupee dollar FDI Flow FDI equity flow हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

आरबीआई के इस प्लेटफॉर्म के जरिए डायरेक्ट सरकारी बॉन्ड में जमकर निवेश कर रहे हैं लोग, मिल रहा बैंक एफडी से ज्यादा ब्याज

आरबीआई ने रिटेल डायरेक्ट प्लेटफार्म को नवंबर 2021 में लॉन्च किया गया डायरेक्ट के साथ निवेश और व्यापार था। इस प्लेटफार्म पर उपलब्ध केंद्र सरकार के बॉन्डों पर निवेशकों को करीब 6.8 फीसदी की ब्याज मिल रही है।

आरबीआई के इस प्लेटफॉर्म के जरिए डायरेक्ट सरकारी बॉन्ड में जमकर निवेश कर रहे हैं लोग, मिल रहा बैंक एफडी से ज्यादा ब्याज

नवंबर 2021 में आरबीआई ने इस प्लेटफार्म को शुरू किया है। (फोटो: रॉयटर्स)

भारतीय रिजर्व बैंक का रिटेल डायरेक्ट प्लेटफार्म निवेशकों के बीच इन दिनों काफी लोकप्रिय हो रहा है। 35 हजार से ज्यादा निवेशक बेहद कम समय में इस प्लेटफार्म से जुड़ गए हैं। इस प्लेटफार्म के जरिए कोई भी व्यक्ति आसानी से सरकारी बॉन्ड खरीद और बेच सकता है। सरकारी बॉन्ड में निवेश होने के चलते यह निवेशकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

एफडी से मिला रहा ब्याज: आरबीआई ने रिटेल डायरेक्ट प्लेटफार्म को नवंबर 2021 में लॉन्च किया गया था। इस प्लेटफार्म पर उपलब्ध केंद्र सरकार के बॉन्डों पर निवेशकों को करीब 6.8 फीसदी की ब्याज मिल रही है जबकि राज्य सरकार के 10 साल के बॉन्ड पर 7.डायरेक्ट के साथ निवेश और व्यापार 2 से लेकर 7.24 फीसदी की ब्याज मिल रही है। जिसकी वजह से बड़ी संख्या में निवेशक बॉन्ड की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

टैक्स फ्री हो सकता है ब्याज: निवेशक बॉन्ड और गिल्ट्स को आसानी से आरबीआई के रिटेल डायरेक्ट प्लेटफार्म के जरिए ऑनलाइन बेच सकते हैं। वहीं इकोनामिक टाइम्स की खबर के मुताबिक सरकार रिटेल निवेश को बॉन्ड मार्केट में प्रोत्साहित करने के लिए इससे होने वाली कमाई पर इनकम टैक्स में छूट भी देने की योजना बना रही है।

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बैंक और इंस्टिट्यूशन का दबदबा होगा खत्म: आमतौर पर दुनिया के ज्यादातर बॉन्ड मार्केट पर वहां की बैंकों और इंस्टीट्यूशंस का एकाधिकार होता है लेकिन आरबीआई इस प्लेटफार्म के जरिए भारत में रिटेल निवेशकों की भी बॉन्ड मार्केट में हिस्सेदारी सुनिश्चित कर रहा है। भारत सरकार के आर्थिक सर्वे 2021-22 के मुताबिक यह योजना मध्यम वर्ग, छोटे व्यवसायियों और वरिष्ठ नागरिकों की बचत को जोखिम मुक्त सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में ले जाने में उपयोगी साबित होगी। इसके लिए आरबीआई पूरे देश में जागरूकता अभियान भी चलाएगा।

कैसे करें निवेश: इस योजना में निवेश के लिए सबसे पहले आपको आरबीआई के पोर्टल पर जाना होगा। जहां आप ऑनलाइन रिटेल डायरेक्ट गिल्ट अकाउंट खोलना होगा। फिर पर इस अकाउंट के जरिए केंद्र सरकार के बॉन्ड, राज्य सरकार के बॉन्ड और ट्रेजरी बिलों में निवेश कर सकते हैं। किसी सरकारी बॉन्ड में आपको कम से कम 10 हजार रुपए निवेश करने होंगे जबकि अधिकतम निवेश की कोई भी सीमा नहीं है। वहीं इसी अकाउंट से आप सॉवरन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में भी निवेश कर सकते हैं। इस योजना में कम से कम आपको 1 ग्राम गोल्ड लेना होगा जिसमें आप 1 साल से 30 साल की अवधि तक निवेश कर सकते हैं।

Direct Vs Regular प्लान; सोच-समझकर सही स्कीम चुनें तभी मिलेगा अच्‍छा रिटर्न

म्यूचुअल फंड (MF) में निवेश की जब भी बात आती है तो अक्सर दो प्लान के बारे में पता चलता है. डायरेक्ट (डायरेक्ट के साथ निवेश और व्यापार Direct) और रेगुलर (Regular) प्लान. अक्सर नये निवेशकों को इन प्लान की ज्यादा समझ नहीं होती और कई बार गलत चुनाव कर लेते हैं.

रेगुलर के मुकाबले डायरेक्ट प्‍लान ज्यादा अलग नहीं है. (Dna)

म्यूचुअल फंड (MF) में निवेश की जब भी बात आती है तो अक्सर दो प्लान के बारे में पता चलता है. डायरेक्ट (Direct) और रेगुलर (Regular) प्लान. अक्सर नये निवेशकों को इन प्लान की ज्यादा समझ नहीं होती और कई बार गलत चुनाव कर लेते हैं. जी बिजनेस के खास शो म्‍यूचुअल फंड हेल्‍पलाइन में हम फौजी इनिशिएटिव के CEO कर्नल संजीव गोविला ने डायरेक्ट और रेगुलर प्लान में फर्क को समझाया. उनके मुताबिक रेगुलर के मुकाबले डायरेक्ट प्‍लान ज्यादा अलग नहीं है.

डायरेक्ट प्लान
डायरेक्ट प्लान म्यूचुअल फंड में निवेश का तरीका
रेगुलर के मुकाबले डायरेक्ट ज्यादा अलग नहीं
दोनों प्लान में आम तौर पर एक्सपेंस रेश्यो का फर्क डायरेक्ट के साथ निवेश और व्यापार
रेगुलर के मुकाबले डायरेक्ट का एक्पेंस रेश्यो होता है कम
डायरेक्ट प्लान में नहीं होता कोई मध्यस्थ
सेबी ने 7 साल पहले की थी डायरेक्ट प्लान की शुरुआत
रेगुलर प्लान के सस्ते विकल्प के तौर पर किया पेश

रेगुलर प्लान
रेगुलर प्लान डायरेक्ट प्लान से ज्यादा अलग नहीं
रेगुलर प्लान की बिक्री होती है मध्यस्थों के जरिए
म्यूचुअल फंड ड्रिस्ट्रीब्यूटर की मदद से करते हैं निवेश
उन निवेशकों के लिए सही, जिन्हें निवेश की ज्यादा समझ नहीं

दोनों में फर्क?
डायरेक्ट और रेगुलर प्लान में खर्च का फर्क
एक ही पोर्टफोलियो में निवेश के दो तरीके
दोनों प्लान आप खुद ऑनलाइन ले सकते हैं
दोनों प्लान में सिर्फ एक्सपेंस रेश्यो का है खर्च
कमीशन न होने का फायदा आपको मिलता है
कमीशन न होने से NAV में बढ़त मिलती है
रेगुलर प्लान में कमीशन डायरेक्ट के मुकाबले ज्यादा
कमीशन के चलते लॉन्ग टर्म में रिटर्न डायरेक्ट के साथ निवेश और व्यापार होता है कम
रेगुलर के मुकाबले डायरेक्ट ज्यादा पारदर्शी

डायरेक्ट में एडवाइजर?
डायरेक्ट हो चाहे रेगुलर, निवेश एक ही तरह से
डायरेक्ट में भी एडवाइजर की भूमिका आती है सामने
डायरेक्ट फंड में निवेशक रख सकता है एडवाइजर
डायरेक्ट के मामले में एडवाइजर RIA होना जरूरी
RIA यानि रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर
RIA सेबी के साथ होते हैं रजिस्टर्ड

डायरेक्ट प्लान के फायदे
डायरेक्ट प्लान में एक्सपेंस रेश्यो कम होता है
कम एक्सपेंस रेश्यो का असर रिटर्न पर भी
रेगुलर के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिलता है
डायरेक्ट का NAV भी ज्यादा होता डायरेक्ट के साथ निवेश और व्यापार डायरेक्ट के साथ निवेश और व्यापार है
RIA किसी म्यूचुअल फंड कंपनी से जुड़ा नहीं
ऐसे में निवेश को लेकर मिलती है निष्पक्ष राय

रिटर्न में फर्क
रेगुलर के मुकाबले डायरेक्ट में ज्यादा रिटर्न की गुंजाइश
डायरेक्ट में कम होता है एक्सपेंस रेश्यो
कम एक्सपेंस रेश्यो के चलते ज्यादा NAV
आम तौर पर दोनों के रिटर्न में 1-1.25% का अंतर

नये निवेशकों के लिए क्या बेहतर?
डायरेक्ट और रेगुलर, दोनों ही नये निवेशक के लिए बेहतर
नये निवेशक के लिए एडवाइजर की राय लेना होता है अहम
म्यूचुअल फंड की ज्यादा समझ नहीं तो एडवाइजर करेगा मदद
एडवाइजर निवेश को लेकर देगा सलाह, पोर्टफोलियो करेगा मॉनिटर
एडवाइजर का काम है निवेशकों को गलती करने से रोकना
एडवाइजर का काम आपका मुनाफा बढ़ाने के लिए राय देना
ए़डवाइजर की सेवा लेकर ही निवेश करना है बेहतर

एडवाइजर का कमीशन
रेगुलर प्लान में अलग-अलग है कमीशन
सेवा के आधार पर चार्जेज भी होते हैं अलग-अलग
पोर्टफोलियो रिव्यू करने, अन्य सेवाओं के लिए चार्ज
इक्विटी म्यूचुअल फंड में करीब 1 फीसदी कमीशन
डेट फंड में करीब 0.5% कमीशन लगता है

रेगुलर से डायरेक्ट में ट्रांसफर
रेगुलर से डायरेक्ट में ट्रांसफर करना डायरेक्ट के साथ निवेश और व्यापार संभव है
ट्रांसफर के दौरान लग सकता है एग्जिट लोड
नियमों के मुताबिक देना पड़ सकता है टैक्स भी
एग्जिट लोड: फंड से तय वक्त से पहले बाहर निकलने का चार्ज
कुछ फंड हाउस कुछ शर्तों के साथ एग्जिट लोड नहीं लेते

भारत और रूस द्विपक्षीय व्यापार के लिए प्रतिबद्ध

भारत और रूस द्विपक्षीय व्यापार के लिए प्रतिबद्ध

भारत व रूस अपने द्विपक्षीय व्यापार व निवेश को बढ़ावा देने के लिए रणनीतियों की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही दोनों देशों ने अपने यहां व्यापार सुगमता में सुधार की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों पक्षों ने एक संयुक्त बयान में कहा,‘दोनों नेताओं ने दिसंबर 2014 में सालाना शिखर सम्मेलन में तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रणालियों के सतत नवीकरण की जरूरत मानी है ताकि सालाना द्विपक्षीय व्यापार व निवेश को बढाया जा सके। दोनों नेताओं ने इस दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।’ यहां ब्रिक्स समूह के शिखर सम्मेलन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच विस्तृत बातचीत के बाद यह बयान जारी किया गया।

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इसके अनुसार दोनों नेताओं ने व्यापार सुगमता और बढाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। साथ ही भारत के नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड (एनआईआईएफ) द्वारा रूस डायरेक्ट इंवेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) के साथ मिलकर द्विपक्षीय निवेश कोष की स्थापना से दोनों देशों में उच्च प्रौद्योगिकी निवेश प्रोत्साहित होगा।

इन नेताओं ने दोनों देशों की कंपनियों का आह्वान किया कि वे फार्मास्युटिकल्स, रसायन, खनन, मशीनरी निर्माण, ढांचागत, रेलवे, उर्वरक, आटोमोबाइल व विमानन विनिर्माण के क्षेत्र में नये व महत्वाकांक्षी निवेश प्रस्ताव तैयार करें।

कृषि व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पदों के लिए साझा बाजार पहुंच के बारे में दोनों देश अपने अपने नियामकीय प्राधिकारों के बीच मौजूदा बातचीत को जारी रखने पर सहमति हुए हैं।

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