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मूल्य लड़ाई

मूल्य लड़ाई
उन्होंने कहा कि सरकार ने तीन नए कृषि कानूनों के जरिए देश के किसानों और मजदूरों के साथ ‘‘धोखा’’ किया था।

सेना के लिए लड़ाई: शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक का चुनाव आयोग का फैसला

सोमवार को अपने एक अंतरिम आदेश में, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट को एक पार्टी के रूप में ‘बालासाहेबंची शिवसेना‘ का नाम आवंटित किया है। साथ ही, आयोग ने उसे मंगलवार तक तीन चुनाव चिन्हों की एक नई सूची पेश करने के लिए कहा है। पार्टी के नाम और ‘धनुष और तीर’ के चुनाव चिन्ह पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने भी दावा किया था। शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल को रोकने का फैसला करते हुए निर्वाचन आयोग ने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और लोक जनशक्ति पार्टी में विभाजन के मामले में अपनाए गए पुराने मिसाल का अनुसरण किया है, जिसमें आयोग ने प्रतिद्वंद्वी मूल्य लड़ाई गुटों के दावों – प्रतिदावों पर अंतिम फैसला लिए जाने तक चुनाव चिन्ह को निलंबित रखा था। वर्षों के आपसी जुड़ाव के बाद राजनीतिक दलों के लिए चुनाव चिन्ह के मायने एक प्रतीक से कहीं ज्यादा हो जाते हैं। कुछ मामलों में तो, चुनाव चिन्ह राजनीतिक अर्थ समेटे हुए होते हैं। मसलन, राष्ट्रीय जनता दल की ‘लालटेन’ और समाजवादी पार्टी की ‘साइकिल’। शिवसेना ने यह महसूस किया होगा कि ‘धनुष और तीर‘ का चुनाव चिन्ह उसकी जुझारू और सख्त छवि की निरंतर जरूरत के माकूल है। वही विरासत अब दोनों गुटों के बीच विवाद का मूल तत्व है। चुनाव आयोग ने भले ही चुनाव चिन्ह और पार्टी के नाम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, लेकिन इसके लिए कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। दोनों गुट अपने दावों के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं परिकल्पनाओं का सहारा ले रहे हैं और चुनाव आयोग के लिए यह निर्धारित करना बेहद कठिन काम होगा कि कौन सा गुट सेना ब्रांड का मालिक है। श्री शिंदे केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी हैं। बाल ठाकरे की विरासत किसे मिलती है, इसका दोनों के राजनीतिक भाग्य पर भारी असर पड़ेगा।

सेना के लिए लड़ाई: शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक का चुनाव आयोग का फैसला

सोमवार को अपने एक अंतरिम आदेश में, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट को एक पार्टी के रूप में ‘बालासाहेबंची शिवसेना‘ का नाम आवंटित किया है। साथ ही, आयोग ने उसे मंगलवार तक तीन चुनाव चिन्हों की एक नई सूची पेश करने के लिए कहा है। पार्टी के नाम और ‘धनुष और तीर’ के चुनाव चिन्ह पर महाराष्ट्र मूल्य लड़ाई के मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने भी दावा किया था। शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल को रोकने का फैसला करते हुए निर्वाचन आयोग ने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और लोक जनशक्ति पार्टी में विभाजन के मामले में अपनाए गए पुराने मिसाल का अनुसरण किया है, जिसमें आयोग ने प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावों – प्रतिदावों पर अंतिम फैसला लिए जाने तक चुनाव चिन्ह को निलंबित रखा था। वर्षों के आपसी जुड़ाव के बाद राजनीतिक दलों के लिए चुनाव चिन्ह के मायने एक प्रतीक से कहीं ज्यादा हो जाते हैं। कुछ मामलों में तो, चुनाव चिन्ह राजनीतिक अर्थ समेटे हुए होते हैं। मसलन, राष्ट्रीय जनता दल की ‘लालटेन’ और समाजवादी पार्टी की ‘साइकिल’। शिवसेना ने यह महसूस किया होगा कि ‘धनुष और तीर‘ का चुनाव चिन्ह उसकी जुझारू और सख्त छवि की निरंतर जरूरत के माकूल है। वही विरासत अब दोनों गुटों के बीच विवाद का मूल तत्व है। चुनाव आयोग ने भले ही चुनाव चिन्ह और पार्टी के नाम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, लेकिन इसके लिए कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। दोनों गुट अपने दावों के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं परिकल्पनाओं का सहारा ले रहे हैं और चुनाव आयोग के लिए यह निर्धारित करना बेहद कठिन काम होगा कि कौन सा गुट सेना ब्रांड का मालिक है। श्री शिंदे केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी हैं। बाल ठाकरे की विरासत किसे मिलती है, इसका दोनों के राजनीतिक भाग्य पर भारी असर पड़ेगा।

हिंदू धर्म बनाम हिंदुत्वः हिंदू मूल्यों की लड़ाई

हिंदू धर्म बनाम हिंदुत्व

  • नई दिल्ली,
  • 14 जनवरी 2022,
  • (अपडेटेड 14 जनवरी 2022, 12:07 PM IST)

सभी का सार ग्रहण करने की हिंदू धर्म की विजयी क्षमता को सृष्टि की उत्पत्ति पर सबसे पहले लिखित चिंतन ऋग्वेद के 'नासदीय सूक्त' की इन पंक्तियों से बेहतर शायद कोई और बयां नहीं करता ''कौन वास्तविक रूप से जानता है? कौन यहां इसे बता सकता है? यह सृष्टि किस कारण से उत्पन्न हुई? देवता भी इस सृष्टि के उत्पन्न होने के बाद आए? इसलिए कौन जानता है कि किस कारण से यह सारा संसार उत्पन्न हुआ?''

यह ऋचा रूढ़ धर्मसिद्धांत की अनुपस्थिति की वजह से उल्लेखनीय है; न कोई निश्चितता मूल्य लड़ाई है; न श्रृद्धा का आदेश है; न धार्मिक आज्ञा पालन, न अनुष्ठान का निर्देश है. इसमें विस्मय है, कुतूहल है, लेकिन सबसे बढ़कर इसमें पड़ताल है, पूछने की, जांच करने की, विचार के पारंपरिक खांचों से आगे परिकल्पना और अनुमान के क्षेत्र में जाने की जरूरत पर जोर है, विचार को आगे बढ़ाने का निमंत्रण है.

कांग्रेस ने किसानों के मुद्दे पर सड़क से संसद तक लड़ाई का संकल्प लिया

पार्टी ने अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों की दो दिवसीय बैठक के बाद यह बात कही। इसके नवनियुक्त प्रमुख सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि वह किसानों और मजदूरों की समस्याओं को जानने के लिए देश भर में दौरा करेंगे और उन्हें समर्थन देंगे।

खैरा ने कहा कि वह सड़क से संसद तक किसानों और मजदूरों की लड़ाई लड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी संस्थाओं का जितना चाहे ‘‘दुरुपयोग’’ करे, लेकिन पार्टी डटी रहेगी और केंद्र की ‘‘जनविरोधी’’ नीतियों का पुरजोर विरोध करेगी।

खैरा ने किसान कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष नाना पटोले और उनकी टीम के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिसने भी पिछले चार वर्षों में लगन से काम किया है, उसे निश्चित रूप से पदोन्नत किया जाएगा।

कांग्रेस ने किसानों के मुद्दे पर सड़क से संसद तक लड़ाई का संकल्प लिया

पार्टी ने अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों की दो दिवसीय बैठक के बाद यह बात कही। इसके नवनियुक्त प्रमुख सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि वह किसानों और मजदूरों की समस्याओं को जानने के लिए देश भर में दौरा करेंगे और उन्हें समर्थन देंगे।

खैरा ने कहा कि वह सड़क से संसद तक किसानों और मजदूरों की लड़ाई लड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी संस्थाओं का जितना चाहे ‘‘दुरुपयोग’’ करे, लेकिन पार्टी डटी रहेगी और केंद्र की ‘‘जनविरोधी’’ नीतियों का पुरजोर विरोध करेगी।

खैरा ने किसान कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष नाना पटोले और उनकी टीम के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिसने भी पिछले चार वर्षों में लगन से काम किया है, उसे निश्चित रूप से पदोन्नत किया जाएगा।

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