विदेशी मुद्रा ट्रेडिंग रणनीति की मूल बातें

शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार

शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार
जहां एक और फंडामेंटल एनालिसिस में कंपनी के बेसिक और मूलभूत शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार चीजों को देखकर उसके शेयर की कीमत के अनुमान लगाया जाते हैं । वही इसके विपरीत टेक्निकल एनालिसिस (technical analysis) में बाजार का अध्ययन किया जाता है।

शेयरों का तकनीकी विश्लेषण (technical analysis)

डमी के लिए स्टॉक में निवेश कैसे करें

शेयरों में निवेश करना कंपनी के मालिक बनने के बारे में है। इसमें एक निवेश वाहन चुनना, ब्रोकरेज खाते को वित्त पोषित करना और अपने पोर्टफोलियो का प्रबंधन करना शामिल है। डमी के लिए स्टॉक मार्केट सभी के लिए स्मार्ट निवेश करना आसान बनाता है। यह स्टॉक खरीदने और बेचने की मूल बातें बताता है ताकि आप समझ सकें कि आप क्या कर रहे हैं।

शेयरों में निवेश एक कंपनी का मालिक बन रहा है शेयरों

में निवेश करने का पहला कदम यह समझना है कि स्टॉक क्या है। एक स्टॉक कंपनी के स्वामित्व का एक अंश है, और एक निवेशक उन कंपनियों में स्टॉक खरीदता है जिनके बारे में उन्हें लगता है कि मूल्य में वृद्धि होगी। जब कंपनी के स्टॉक का मूल्य बढ़ता है, तो निवेशक स्टॉक को लाभ के लिए बेच सकता है। इसका मतलब है कि निवेशक कंपनी का एक हिस्सा मालिक होगा, और कंपनी शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार की कुछ कमाई का आनंद ले सकता है।

शेयरों में निवेश करना आपके शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार पोर्टफोलियो में विविधता लाने और एक सफल कंपनी का हिस्सा बनने का एक शानदार तरीका है। शेयरों में निवेश लंबी अवधि के विकास की संभावना प्रदान करता है, लेकिन जोखिम भी हैं। शेयरों से लाभांश की गारंटी नहीं है, और कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए, निवेश करने से पहले विभिन्न प्रकार के शेयरों और इसमें शामिल जोखिमों के बारे में जानना महत्वपूर्ण है।

एक निवेश वाहन चुनना

के कई अलग-अलग तरीके हैं । विभिन्न निवेश वाहन अलग-अलग शुल्क और लागत के साथ आते हैं। अपने पैसे का निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका टैक्स-फ्री वाहन चुनना है। हालांकि, आपको कुछ निवेश वाहनों से जुड़े जोखिमों पर भी विचार करना चाहिए। उदाहरण के लिए, बांड सुरक्षित निवेश हैं, लेकिन वे स्टॉक और म्यूचुअल फंड की तुलना में कम रिटर्न देते हैं।

यदि आपके पास दीर्घकालिक निवेश क्षितिज है तो जमा प्रमाणपत्र (सीडी) एक बढ़िया विकल्प हैं। हालांकि उनके पास अन्य निवेशों की तुलना में कम रिटर्न की दर है, लेकिन अधिकांश बैंकों के साथ उन्हें खोलना आसान है। एक और बढ़िया विकल्प एक मुद्रा बाजार खाता है, जो एक ऑनलाइन बचत खाते के समान है। इन खातों से आप प्रति माह छह बार तक धनराशि निकाल सकते हैं।

ब्रोकरेज अकाउंट में फंडिंग ब्रोकरेज अकाउंट में फंडिंग

करने के दो तरीके हैं: चेक या वायर ट्रांसफर के जरिए। कुछ फर्म आपको यह बताने की अनुमति देंगी कि आपके खाते के बारे में निर्णय लेने के लिए कौन अधिकृत है। दूसरों को आपको अतिरिक्त दस्तावेज प्रदान करने की आवश्यकता होगी। किसी भी तरह से, दूसरों को अपने खाते पर अधिकार देने के जोखिमों और लाभों को समझना महत्वपूर्ण है।

यदि आप शेयरों में निवेश करना चाहते हैं तो आपको ब्रोकरेज खाते में फंड देना चाहिए। यह खाता बैंक खाते से अलग है। यह आपके निवेश को रोकेगा और आपके बैंक के अलावा किसी अन्य कंपनी में हो सकता है। आप कौन सी कंपनी चुनते हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना पैसा निवेश करने की योजना बना रहे हैं।

एक बार आपके पास ब्रोकरेज खाता होने के बाद, आप विभिन्न प्रकार के निवेशों को खरीद और बेच सकते हैं। आप स्टॉक, बॉन्ड, ईटीएफ और म्यूचुअल फंड खरीदने और बेचने के लिए इसका इस्तेमाल करना चुन सकते हैं। आप एक वित्तीय फर्म के साथ ब्रोकरेज खाता खोल सकते हैं, या निवेश करने के लिए ऑनलाइन ब्रोकर का उपयोग कर सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म पूर्ण-सेवा निवेश योजना, व्यक्तिगत सलाह और बाजार की खुफिया जानकारी प्रदान करती हैं।

तकनीकी विश्लेषण की बारीकियां (The nuances of technical analysis)

निवेशकों को अधिकतर सलाह दी जाती है कि उन्हें बाजार में सही समय की पहचान पर ध्यान देने के बजाय एक निश्चित अवधि तक क्रमिक निवेश करना चाहिए और यह सलाह सही भी है । परंतु बाजार के सही समय की पहचान करने में अक्सर पुराने लोग भी मात खा जाते हैं ऐसा नहीं है कि दिग्गज खिलाड़ियों को बाजार की अनिश्चितता का पता नहीं होता है।

उसके बावजूद भी अधिक धन कमाने का लालच इनको बाजार की अनिश्चितता में डुबो देता है। प्रत्येक निवेशक बाजार से अधिक धन कमाना चाहता है और उसकी इच्छा बाजार की गतिविधियों और उसकी चंचलता को ध्यान में रखकर तकनीकी विश्लेषण की शुरुआत हुई।

तकनीकी विश्लेषण शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार का उद्देश्य विभिन्न निवेशकों की टाइमिंग तथा कीमतों में अपेक्षित परिवर्तन का अनुमान लगाना है। तकनीकी विश्लेषण का पूरा फोकस शेयर की कीमत उनके ट्रेडिंग वॉल्यूम पर रहता है पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए शेयर के शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार बदलाव उनके उतार-चढ़ाव उनसे जुड़े ट्रेडिंग वॉल्यूम के विश्लेषण करके विभिन्न प्रकार के चार्ट ग्राफ मूविंग एवरेज ट्रेंड आदि टूल बनाए जाते हैं । उनका उपयोग आगामी लघु काल, मध्यकाल, और दीर्घकालिक अवधि के दौरान शेयर के शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।

चार्ट का विश्लेषण (Chart analysis)

बीते कुछ दिनों मैं शेयर की कीमत उसके ट्रेंडिंग वॉल्यूम को प्रतिदिन के आधार पर दर्शाने के लिए चार्ट बनाया जाते हैं । और यह चार्ट आज काफी ज्यादा प्रचलित है। चार्ट में लाइन चार्ट बार चार्ट कैंडलेस्टिक चार्ट आदि प्रमुख है जो विभिन्न ट्रेंडिंग वॉल्यूम और कुछ दिनों के अंतराल के हिसाब से बनाए जाते हैं । जो कि लगभग सभी एक शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार जैसी सूचनाएं देते हैं।

इन चार्ट के द्वारा शेयर के ट्रेंड और उनके पैटर्न स्कोर जानने की कोशिश की जाती है और यह अनुमान लगाए जाते शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार हैं कि यह ट्रेंड किस समय से बना है और किस समय तक चलेगा और इस ट्रेंड में कब परिवर्तन आ सकता है इसके आधार पर निवेशक अपना निवेश करते हैं।

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अपवर्ड ट्रेंड (Upward trend)

इस ट्रेंड में किसी शेयर की कीमत निरंतर बढ़ती है इस प्रकार के शेयरों में शॉर्ट टर्म (short term) निवेशक शेयर को खरीद कर बाद में अच्छे दामों पर बेचकर लाभ कमाते हैं । इससे यह पता लगाया जाता है की शेयर का ट्रेडिंग वॉल्यूम और शेयरों की कीमत लगातार बढ़ रही है । और निवेशक इसमें काफी ज्यादा निवेश कर रहे शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार हैं । परंतु यदि शेयर की कीमत में वृद्धि हो रही हो और उसके ट्रेंडिंग वॉल्यूम में अपेक्षाकृत वृद्धि नहीं हो रही हो तो उस शहर में सट्टा बाजारी हो रही है।

जब ग्राफ्ट या चार्ट नीचे जाने लगते हैं , शेयरों की कीमत में गिरावट दर्ज होती है। तो इसे शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार डाउनवार्ड ट्रेंड (Downward trend) कहते हैं । कई निवेशक डाउनवार्ड ट्रेंड में खरीदारी कर अच्छे दाम आने पर या अपवर्ड ट्रेंड होने पर शेयर बेचकर लाभ कमाते हैं । यहां भी ट्रेंड को पहचानना और उसकी टाइमिंग महत्वपूर्ण है क्योंकि डाउनवार्ड ट्रेंड में खरीदे गए शेयर काफी कम कीमत पर शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार मिल जाते हैं । और भविष्य में अच्छा लाभ देते हैं।

साइडवेज ट्रेंड (Sideways trend)

जब ग्राफ या चार्ट का ट्रेंड छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव के साथ एक जैसा दिखाई देता है। तो ऐसे ट्रेंड को Sideways trend कहा जाता है । Sideways trend के दौर में शेयरों की गति में कुछ खास मोमेंट नहीं होता है । यह यह कुछ ऊपर कुछ नीचे होता रहता है और इस दौरान इसका ट्रेंडिंग वॉल्यूम बहुत कम होता है।

ट्रेंडिंग वॉल्यूम का मतलब एक निश्चित समय में बाजार से खरीदे या बेचे शेयरों में दीर्घकालिक निवेश और निवेश विश्लेषण के प्रकार गए शेयरों की संख्या होती है जिससे कि ट्रेंडिंग वॉल्यूम कहा जाता है।तकनीकी विश्लेषण में ट्रेंडिंग वॉल्यूम (trending volume) का बहुत महत्वपूर्ण रोल है। इससे मार्केट में एक्टिव निवेशक और बड़े निवेशकों की उपस्थिति ,अनुपस्थिति का पता चलता है। विश्लेषक ट्रेंडिंग वॉल्यूम को देखकर share के रुझान का पता लगाते हैं।

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