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एक पेनेटेंट बुलिश है?

एक पेनेटेंट बुलिश है?
कंपनी का कहना है कि पाउडर से जो जेल बनता है वो 10 साल तक रह सकता है.

रिवर ड्रेजिंग

हर साल दुनिया भर में रिवर ड्रेजिंग की जरूरत बढ़ जाती है। एक नदी के प्राकृतिक प्रवाह को घेरने वाले समुदाय बारिश के मौसम में वार्षिक बाढ़ के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं। यदि नदी का रख-रखाव ठीक से नहीं किया गया तो गाद, रेत और मलबे जमा हो सकते हैं और अड़चन बन सकती है। यदि एक बड़ी बारिश की घटना होती है, तो टोंटी प्रवाह को प्रतिबंधित कर देगी और नदी अपने बैंकों और बाढ़ के स्थानीय व्यवसायों और आवासों से ऊपर उठ जाएगी, जिससे लाखों डॉलर की संपत्ति को नुकसान होगा और जीवन का संभावित नुकसान होगा। नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने और आपदा की संभावनाओं को सीमित करने के लिए नदी का ड्रेजिंग आवश्यक है।

यदि आप वर्सी-ड्रेज उपकरण और अपने नहर रखरखाव और ड्रेजिंग जरूरतों के बारे में किसी से बात करना चाहते हैं, तो (866) 483-0014 पर कॉल करें या हमें अपनी परियोजना के बारे में बताने के लिए नीचे "आरंभ करें" पर क्लिक करें।

वर्सी-ड्रेज क्षमताएं

वर्सी-ड्रेज का उपयोग दुनिया भर में विभिन्न नदी ड्रेजिंग गतिविधियों के लिए किया गया है, जिसमें बाढ़ शमन, रेत खनन, नेविगेशन चैनल गहरा करना, और पर्यावरण ड्रेजिंग शामिल है। वर्सी-ड्रेगेज के एक-ट्रक परिवहन योग्य डिज़ाइन नगरपालिका सरकारों और ठेकेदारों को ड्रेग को एक मुसीबत स्थान पर जल्दी से तैनात करने और उचित गहराई और हाइड्रोलिक प्रवाह बनाए रखने के लिए इसे खोलने की अनुमति देता है। ड्रेज को तब आसानी से एक क्रेन द्वारा हटाया जा सकता है और साइट को तब तक संग्रहीत किया जा सकता है जब तक कि इसे फिर से नदी के रखरखाव के लिए आवश्यक न हो।

पर्यावरणीय ड्रेजिंग के मामले में, वर्सी-ड्रेज को एक कस्टमाइज्ड पंप से तैयार किया जा सकता है, जो सामान्य हाइड्रोलिक ड्रेज की तरह क्लॉगिंग के बिना कैन, बोतल, प्लास्टिक बैग, रस्सियों, चावल की बोरियों आदि को काट और पंप कर सकता है। यह ऑपरेटरों को नदियों से गाद और कीचड़ को हटाने की अनुमति देता है जहां घनी आबादी ने नदी को कूड़ेदान के रूप में इस्तेमाल किया है।

प्रदूषण की सफाई के मामले में, वर्सी-ड्रेज को केबल ड्राइव मोड और ए में रखा जा सकता है जीपीएस सिस्टम और पर्यावरणीय कटटरहेड नदियों से दूषित पदार्थों की परतों को हटाने और उन्हें एक जल उपचार संयंत्र में पंप करने के लिए एक सटीक ग्रिड प्रारूप में सर्जिकल ड्रेजिंग कर सकते हैं।

'ठोस बारिश' से मिलेगी सूखे से निज़ात?

'ठोस बारिश' से मिलेगी सूखे से निज़ात?

लेकिन क्या "सॉलिड रेन" इस समस्या से निज़ात दिला सकता है? और क्या इसका इस्तेमाल कर कई गुना ज़्यादा फसल हासिल की जा सकती है.

संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि हम जो पानी इस्तेमाल करते हैं उसमें एक बड़ा हिस्सा सिंचाई का होता है. कुछ शोधकर्ता इस पहलू पर काम कर रहे हैं कि क्या खेती में पानी लंबे समय तक इस्तेमाल हो सकता है.

सॉलिड रेन असल में एक पाउडर है जो बहुत ज़्यादा मात्रा में पानी सोख सकता है और फिर इसे पूरे साल थोड़ा-थोड़ा कर के छोड़ता रहता है ताकि पौधे सूखे में भी ज़िंदा रह सकें.

ख़ास बात ये कि सिर्फ 10 ग्राम पाउडर एक लीटर पानी सोख सकता है. इस पाउडर में इस्तेमाल होने वाला पदार्थ एक तरह का शोषक पॉलीमर होता है जिसे मूल रूप से अमेरिका के कृषि विभाग ने तैयार किया है.

'300 फीसदी ज़्यादा फसल'

कंपनी का कहना है कि पाउडर से जो जेल बनता है वो 10 साल तक रह सकता है.

इस तकनीक का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल यूं तो बच्चों की नैपी में होता है लेकिन मेक्सिको के एक इंजीनियर सर्गियो जीसस रिको वेलासो ने इस तकनीक का एक अलग पेटेंट वाला संस्करण तैयार किया.

वेलासो ने एक कंपनी बनाई जो "सॉलिड रेन" बेचती है. ये कंपनी बीते 10 साल से मेक्सिको में ये उत्पाद बेच रही है.

कंपनी का कहना है कि मेक्सिको की सरकार ने "सॉलिड रेन" का परीक्षण किया और पाया कि इसे मिट्टी में मिलाने पर 300 फीसदी ज़्यादा फसल हासिल की जा सकती है.

सॉलिड रेन कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट एडविन गोन्जालेज़ के मुताबिक पानी की कमी की वजह से लोगों की इस उत्पाद में दिलचस्पी बढ़ी है.

गोंजालेज़ ने बीबीसी से कहा, "ये पाउडर पानी को जकड़ लेता है, हमारा उत्पाद ज़मीन में 8 से 10 साल तक बना रहता है, शुद्ध पानी इस्तेमाल करने पर ये और लंबे समय तक टिकता है."

सॉलिड रेन कंपनी का कहना है कि एक हेक्टेयर ज़मीन में 50 किलोग्राम पाउडर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

"ऐसे उत्पाद नए नहीं हैं और ऐसे वैज्ञानिक प्रमाण भी नहीं हैं जिनसे ये लगे कि ये पानी कई साल तक रोक सकते हैं या मिट्टी में 10 साल तक रह सकते हैं."

-डॉक्टर लिंडा चाकर स्कॉट, वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी

हालांकि ये पाउडर सस्ता नहीं है, 50 किलोग्राम पाउडर की कीमत 1500 डॉलर यानी करीब 92 हज़ार रुपये है.

सॉलिड रेन का दावा है कि ये पाउडर प्राकृतिक है और कई साल तक इस्तेमाल किए जाने पर भी मिट्टी को ख़राब नहीं करेगा.

गोंजालेज़ कहते हैं, "हमारा उत्पाद ज़हरीला नहीं है, विघटित होने के बाद ये पौधे का हिस्सा बन जाता है."

'उतना असरदार नहीं'

हालांकि सभी इससे सहमत नहीं हैं कि सॉलिड रेन सूखे की समस्या का महत्वपूर्ण हल है.

वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी की डॉक्टर लिंडा चाकर स्कॉट कहती हैं, "ऐसे उत्पाद नए नहीं हैं और ऐसे वैज्ञानिक प्रमाण भी नहीं हैं जिनसे ये लगे कि ये पानी कई साल तक रोक सकते हैं या मिट्टी में 10 साल तक रह सकते हैं.

जैसे ही जेल सूखने लगते हैं ये वातावरण का पानी भी सोखने लगते हैं. इसका मतलब ये हुआ कि ये सीधे पौधों की जड़ों से पानी लेने लगेंगे."

उनका मानना है कि लकड़ी का बुरादा भी उतना ही प्रभावकारी है और सस्ता भी है.

भले ही विज्ञान सॉलिड रेन जैसे पाउडर से होने वाले फ़ायदे के बारे में पूरी तरह से आश्वस्त न हो, सॉलिड रेन के वाइस प्रेसिडेंट एडविन गोंजालेज़ कहते हैं, "ऑस्ट्रेलिया और भारत के सूखे इलाकों से हमसे इस पाउडर के बारे में पूछा जा रहा है."

शाओमी के स्मार्ट चश्मे का पेटेंट, कर सकेगा फोटोथेरेपी

शाओमी के स्मार्ट चश्मे का पेटेंट, कर सकेगा फोटोथेरेपी

चाइनीज टेक कंपनी शाओमी इनोवेटिव फीचर्स वाले प्रोडक्ट्स के पेटेंट लेती रहती है और इस बार एक स्मार्ट चश्मे का डिजाइन सामने आया है। पेटेंट को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में शाओमी अपने स्मार्ट ग्लासेज लॉन्च कर सकती है। कंपनी के स्मार्ट ग्लासेज में स्टैंडर्ड फीचर्स के अलावा 4D डिटेक्शन और थेरेप्यूटिक सिग्नल एमिटर दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि शाओमी के नए स्मार्ट ग्लासेज कई बीमारियों का इलाज कर सकेंगे।

कई दिमागी बीमारियों का इलाज

GizmoChina की रिपोर्ट में कहा गया है कि शाओमी स्मार्ट ग्लासेज में दिए गए थेरेप्यूटिक सिग्नल एमिटर फीचर की मदद से फोटोथेरेपी भी की जा सकेगी। यानी कि नए फीचर के साथ शाओमी स्मार्ट ग्लासेज कई तरह की दिमाग से जुड़ी बीमारियों का इलाज कर पाएंगे। इसकी मदद से अवसाद, तनाव और आंखों की थकान को ठीक किया जा सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, लाइट सिग्नल्स में अल्ट्रावायलेट, इन्फ्रारेड, लेजर और विजिबल लाइट सिग्नल्स शामिल हो सकते हैं।

दिमाग तक साउंड सिग्नल भेजेंगे ग्लासेज

रिपोर्ट के मुताबिक शाओमी के स्मार्ट ग्लासेज विजुअल सिग्नल्स के अलावा साउंड सिग्नल्स भी दिमाग को भेज पाएंगे। इस फीचर के साथ ग्लासेज की क्षमता और बढ़ जाएगी। ग्लासेज में रियल टाइम कनेक्टिविटी और नोटिफिकेशंस जैसे स्टैंडर्ड फीचर्स भी मिल सकते हैं। कंपनी ने आधिकारिक रूप से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है और कोई घोषणा नहीं की है। ग्लासेज के डिजाइन से लेकर बाकी तकनीकी स्पेसिफिकेशंस की जानकारी भी फिलहाल सामने नहीं आई है।

बेहद अलग है स्मार्ट ग्लास का कॉन्सेप्ट

शाओमी की ओर से पेटेंट लिए जाने का मतलब यह नहीं है कि उसे फाइनल प्रोडक्ट का हिस्सा बनाया जाएगा या फिर मार्केट में जरूर लॉन्च किया जाएगा। बेशक यह सिर्फ एक पेटेंट हो लेकिन इसका कॉन्सेप्ट काफी अलग है। कई दूसरी कंपनियां भी स्मार्ट ग्लास पर काम कर रही हैं लेकिन किसी स्मार्ट ग्लास में फोटोथेरेपी जैसा फीचर नहीं देखने को मिला है। सर्च इंजन कंपनी गूगल भी लंबे समय तक स्मार्ट ग्लासेज पर काम कर चुकी है।

ऐपल और फेसबुक भी कर रहे काम

प्रीमियम टेक कंपनी ऐपल के स्मार्ट ग्लास से जुड़े लीक्स हाल ही में सामने आए हैं और इन्हें एडवांस्ड फीचर्स के साथ लॉन्च किया जाएगा। वहीं, सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक भी अपने स्मार्ट ग्लासेज पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में स्मार्ट ग्लासेज लोगों की जिंदगी का हिस्सा होंगे लेकिन फिलहाल ऐसा कोई प्रोडक्ट मार्केट में नहीं आया है, जिसे रोज इस्तेमाल किया जा सके।

जीएसपी क्रॉप साइंस ने व्हाईट फ्लाई कीट का सामना करने के लिए अपने कीटनाशक सूत्रीकरण का विशेष पेटेंट जीता

पाइरीप्रोक्सी फेन और डायफेन्थुरान जो GSP SLR 525 SE के नाम से उपलब्ध है। उसके लिए सहक्रियाशील मिश्रित घोल का सूत्रीकरण तैयार करने वाली भारत की पहली कम्पनी।

मुंबई: जीएसपी क्रॉप साइंस, एग्रो केमिकल कारोबार की अग्रणी और अपने R&D केंद्र में SE सूत्रीकरण करने वाली भारत की पहली कम्पनी को, पेटेंट और डिज़ाइन नियंत्रक प्रमुख कार्यालय द्वारा पाइरीप्रोक्सीफेन और डायफेंथियूरोन (GSP SLR 525 SE सूत्रीकरण के रूप में ब्रांडेड) के सहक्रियाशील मिश्रित घोल के सूत्रीकरण का विशेष पेंटेंट हासिल हुआ है, जो औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के अधीनस्थ कार्यालय है।

एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में, पेटेंट और डिज़ाइन नियंत्रक ने जीएसपी क्रॉप साइंस के कीटनाशक सूत्रीकरण के समर्थन में अपना आदेश पारित किया, जो देश में व्हाइटफ्लाई के घातक असर को नियंत्रित करेगा। जीएसपी क्रॉप साइंस पहली भारतीय कंपनी है जो भारत की स्थानीय तकनीक से डायफेंथियूरोन का उत्पादन कर रही है, और साथ ही कई देशों में इसका निर्यात कर रही है। किसी SEसूत्रीकरण में डायफेंथियूरोन + पाइरीप्रोक्सीफेन का एकमात्र सम्मिश्रण तैयार करने वाली पहली कम्पनी भी जीएसपी है।

कृषि, बागवानी और वानिकी फसलों की पैदावार में हुई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष बरबादी का प्रमुख कारण व्हाईट फ्लाईस रही हैं, इसलिए, ये देश के कृषि क्षेत्र के एक पेनेटेंट बुलिश है? लिए चिंता का प्रमुख विषय बन गई हैं। आंकड़ों के हिसाब से, भारत में नारियल और ताड़ के तेल का लगभग 1.35 हेक्टर इन व्हाईट फ्लाईस के एक पेनेटेंट बुलिश है? कारण प्रभावित होता है। साथ ही ये खेतों में कपास कटाई की प्रक्रिया को भी बुरी तरह से प्रभावित करती हैं।

जीएसपी का नया कीटनाशक सूत्रीकरण SLR 525 SE किसानों का एक भरोसेमंद ब्रांड है और व्हाइट फ्लाई जैसे घातक कीट के नियंत्रण के लिए पहली पसंद बन चुका है। ये बहुत ही प्रभावी तरीके से घातक व्हाइट फ्लाई कीट के समस्त जीवन चक्र का नियंत्रण और संचालन करता है जिसने कपास को बरबाद किया है। ये सतह पर जल्दी फैलने और एक सतह से दूसरी तक समान रूप से पहुँचने के गुण के कारण पौधों की सतह पर काफ़ी प्रभावी होता है। ये जल-आधारित मिश्रण होने के कारण EC सूत्रीकरण में काम में लिए गए विलायकों के पर्यावरण पर होने वाले हानिकारक प्रभावों को नष्ट कर देता है।

जीएसपी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड- भारत की अग्रणी एग्रो केमिकल्स एक पेनेटेंट बुलिश है? उत्पादन कंपनियों में से एक है। ये भारतीय कृषि और किसानों के समुदाय के लिए कीटनाशकों, फफूंद नाशकों, शाकनाशकों (फसल सुरक्षा सोल्यूशंस) की "टेक्निकल" व "सूत्रीकरण" और पौध नियंत्रकों की एक विस्तृत श्रृंखला का उत्पादन करती है। इस पेटेंट को हासिल करने के बाद, जीएसपी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड के, प्रबंध- संचालक, भावेश शाह ने कहा, "खून, पसीने और आंसुओं के क़रीब आठ वर्षों और हमारी R&D तथा क़ानूनी टीम की सहायता से, जीएसपी को ऐसे संयोजित उत्पाद के लिए पेटेंट दिया गया है जो किसानों के लिए बहुत फ़ायदेमंद होगा । हमारा उत्पाद SLR 525 जो कपास और सब्ज़ियों के हर चरण में व्हाईट फ्लाई कीट के हमलों से लड़ने में मदद करता है-भारतीय बाज़ार में अपनी किस्म का पहला उत्पाद है।

हम इस मोलेक्यूल को कुछ ही वर्ष में क़रीब 400 करोड़ रुपए का वार्षिकराजस्व पैदा करने वाले के रूप में प्रस्तुत करेंगे। हमें उम्मीद है कि इस उत्पाद का बाज़ार आगे और बढ़ेगा। हालंकि, जीएसपी क्रॉप साइंस के लिए इस विशेष पेटेंट को हासिल करना बहुत कठिन था। जीएसपी ने 27 जनवरी 2014 को " पाइरीप्रोक्सीफेन 5% और डायफेंथियूरोन 25% का एक सहक्रियाशील मिश्रित घोल सूत्रीकरण " अल्पकालीन पेटेंट निवेदन पत्र संख्या 284/ Mum/2014 दाख़िल किया था, जिसके बाद तुरंत ही दिसंबर 2014 में इसी से सम्बंधित पूरा ब्यौरा सूत्रीकरण और जैव क्षमता के साथ दिया गया।सूत्रीकरण की प्रगति पर काम 2015 में शुरू हुआ और पूरा विवरण (सूत्रीकरण, विषाक्तता और जैव क्षमता) CIB में जून 2017 में 9(3) के अंतर्गत नामांतरण के लिए दर्ज किया गया।9(3) के अंतर्गत इस सूत्रीकरण के लिए CIB स्वीकृति अगस्त 2018 में मिली।

जैसी उम्मीद थी, अलग-अलग विरोधियों द्वारा सात अनुमोदन-पूर्व विरोध दर्ज किए गए थे।बाद में, एक वापस ले लिया गया और बाक़ी छः को सितम्बर 2021 में दिल्ली के पेटेंट कार्यालय में नियंत्रक के सामने सुना गया और उन पर पूरी तरह बहस हुई। 8 अप्रेल, 2022 को, आख़िरकार पेटेंट दिया गया, बेयरिंग नंबर 394568, जो दाखिल करने वाली दिनांक से ( 27/1/2014) 20 वर्षों तक मान्य होगा, प्रतिवर्ष नियमित नवीनीकरण भुगतान की शर्त के साथ। अप्रेल 2022 में, एक विरोधी मामले को इस आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ले गया कि जीएसपी को ग़लत तरीके से पेटेंट दिया गया है। माननीय न्यायधीश महोदय के समक्ष मुद्दों पर बहस हुई और आख़िर में पेटेंट को आंशिक रूप में पेटेंट कार्यालय वापस करने के बाद अंतिम अनुमोदन आदेश में सिर्फ़ उन तीन ग़ायब मुद्दों पर विचार आमंत्रित किए गए जिन पर अनुदान-पूर्व विरोध के समय बहस की जा चुकी थी ( न्यायधीश महोदय ने किसी तरह के पुनर्विचार पर ज़ोर नहीं दिया था)। आख़िरकार 25 अगस्त, 2022 को, नियंत्रक ने अपने पिछले अनुमोदन को वैसे ही रखते हुए, नया अनुमोदन आदेश जारी किया।

भावेश शाह का मानना है कि जीएसपी क्रॉप साइंस वित्त वर्ष 22-23 में व्हाइट फ्लाई कारोबार में अपना मार्केट शेयर काफ़ी ज़्यादा बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा " हमारे इस नायाब सूत्रण को मिले विशेष पेटेंट के बाद जीएसपी अपने तकनीकि नवीनीकरण लाने की क्षमता में मज़बूती दिखा पाएगी जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली है, साथ ही इस पेटेंट मिले उत्पाद को विशेष रूप से उपलब्ध करवाने के लिए एक ख़ास वितरण चैनल को बनाने की मज़बूत शुरुआत कर पाएगी, इससे हमारा वितरण नेटवर्क फैलेगा जो व्यापक चैनल के तौर पर आगे बढ़ने के लिए हमारे पोर्टफोलियो की स्वीकृती को मज़बूत करेगा।

1200 करोड़ रुपए के वार्षिक वित्तीय टर्न ओवर और गुजरात, जम्मू -कश्मीर में चार उत्पादन इकाइयों के साथ, जीएसपी क्रॉप साइंस के पास 70 से ज़्यादा ब्रांडेड उत्पाद हैं- जो 5,000 वितरकों, 30, 000 से ज़्यादा डीलरों और 34 डिपों के नेटवर्क के जरिए भारत में बेचे जाते हैं और 25 देशों को निर्यात किए जाते हैं।

जीएलए की लेक्चरर ने किया वाहनों में ओवरलोडिंग पर रिसर्च, पेटेंट पब्लिश

ओवरलोडिंग के कारण अधिकतर दुर्घटनाएं देखने को मिलती है ऐसी समस्या के समाधान हेतु जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के पॉलिटेक्निक संस्थान की लेक्चरर ने आधुनिक खोज की है। इसके लिए एक डिवाइस का आईडिया सुझाया है। लेक्चरर के इस आईडिया का पेटेंट पब्लिश हो गया है।

‘ओवरलोडिंग प्रोटेक्शन इन व्हीकल्स’ पर जीएलए विश्वविद्यालय पॉलिटेक्निक संस्थान की लेक्चरर अंजू उपाध्याय ने आधुनिक खोज करते हुए एक आइडिया सो जाते एक आधुनिक डिवाइस की खोज की है जिसे भार सेंसर, रिले ऑडिनो, एवं एंटरटेनमेंट ऑफ थिंग्स तकनीकी सहायता से तैयार किया है। यह डिवाइस किसी भी गाड़ी के स्टार्ट स्विच और सीट के नीचे लगे भार सेंसर से कनेक्ट होगी।

लेक्चरर अंजू उपाध्याय ने रिसर्च के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ओवरलोडिंग प्रोटेक्शन इन विकल्प डिवाइस में एक ऐसा सर्किट लगा होगा जो कई वर्षों तक कार्य करेगा। तथा इसकी मेंटेनेंस कीमत भी लगभग शून्य के बराबर होगी। साथ ही किसी भी व्हीकल की सीट और उसके स्टार्ट स्विच के साथ फिट किए जाने और अतिरिक्त वजन होने के बाद भी व्हीकल स्टार्ट नहीं होगा। अगर व्हीकल स्टार्ट करना होगा तो उसमें से अतिरिक्त भार को हटाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि यह डिवाइस यातायात पुलिस के लिए अच्छी साबित होगी और चेकिंग के दौरान प्रत्येक गाड़ी को रोकने की जरूरत नहीं होगी।

डीन रिसोर्स जनरेशन एंड प्लैनिंग डॉक्टर दिवाकर भारद्वाज एवं प्रधानाचार्य डॉ विकास कुमार शर्मा ने बताया कि ओवरलोडिंग को लेकर सरकार भी कई कदम उठा चुकी है। इसके बावजूद वाहन चालक अतिरिक्त यात्री बिठा लेते हैं जो कि नियमानुसार सही नहीं है। इसी को देखते हुए जीएलए पॉलिटेक्निक संस्थान की लेक्चरर ने इस समाधान हेतु एक रिसर्च किया काफी लंबे समय कार्य करने के बाद परिणाम निकला और पेटेंट पब्लिक कराया। डीन रिसर्च प्रोफेसर कमल शर्मा ने बताया कि पैटर्न पब्लिश होने के बाद अब इस डिवाइस पर आगे कार्य किया जाएगा और इस पेटेंट को ग्रांट कराने के बाद मांग के अनुसार डिवाइस मार्केट में लाने की कोशिश होगी। यह रिसर्च जीएलए के छात्रों को भी प्रेरित कर रहा है।

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